दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मोबाइल टावरों के डिवाइस समेत अन्य उपकरण चुराने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर स्कैप डीलर समेत चार को गिरफ्तार किया है। आरोपी मोबाइल टावरों से डिवाइस चुराकर कबाड़ी को सस्ते दामों पर बेच देते थे। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से यूपी, हरियाणा व दिल्ली में मोबाइल टॉवरों से उपकरण चुराने के 19 केसों को सुलझाने का दावा किया है।
अपराध शाखा डीसीपी मोनिका भारद्वाज के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आर्य नगर नैपुरा लोनी गाजियाबाद यूपी निवासी पुनीत उर्फ बॉबे(31) और रवि(32),ट्रोनिका सिटी, गाजियाबाद, यूपी निवासी सोनू खान(24) और स्कैप डीलर मुमतियाज के रूप में हई है। डीसीपी ने बताया कि रिलायंस जियो इनफोकॉम लिमिटेड की तरफ से 2020 के लॉकडाउन से लेकर 2021 के लॉकडाउन तक मोबाइल टावरों के उपकरण चोरी होने की काफी शिकायतें मिली थीं। दिल्ली-एनसीआर में इस तरह के कुल 77 मामले दर्ज हुए थे।
इससे पता लगा कि मोबाइल टॉवरो से उपकरण चुराने वाला गिरोह सक्रिय है। एसीपी संदीप लांबा की देखरेख में इंस्पेक्टर पंकज मलिक की टीम इस गिरोह की तलाश कर रही थी। कई दिनों की जांच के बाद स्कैप डीलर को मुमतियाज को पुराना मुस्तफाबाद से दस अगस्त को गिरफ्तार किया गया। उसके गोदाम से भारी काफी मोबाइल उपकरण बरामद किए गए।
उससे पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी चुराए गए मोबाइल टॉवर उपकरणों को स्कैप डीलर मुमतियाज को बेच देते थे। मुमतियाज उक्त उपकरणों को मोटी दर पर अन्य कबाड़ी को बेच देता था। पुनीत 13 वर्ष की उम्र में मुंबई में चला गया था। वहां उसने सात वर्ष तक स्थानीय केबल नेटवर्क का काम करने वाले व्यक्ति के यहां नौकरी और फिर गाजियाबाद आ गया। इसके बाद एयरटेल, वोडाफोन व जियो का टावर लगाने का काम शुरू किया। लॉकडाउन के बाद सोनू खान, सलमान व रवि अग्रवाल के साथ मिलकर उपकरण चोरी कर कबाड़ी को बेचना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ मेरठ में भी केस दर्ज है।
सोनू खान ने ग्वालियर, मध्य प्रदेश से इलेक्ट्रीशियन से आईटीआई करने के कारण उसे इलेक्ट्रिक व वायरिंग करने की जानकारी होती थी। उसके खिलाफ बाहरी, उत्तरी, पश्चिमी व उत्तर-पूर्वी जिले के थानों में हाल के छह मामले दर्ज हैं। रवि अग्रवाल लोनी में सट्टा चलाने के अलावा स्मैक बेचता था। इसके खिलाफ गायिजाबाद में कई थानों में मामले दर्ज हैं। मुस्तफाबाद, दिल्ली निवासी मुमतियाज बाहरी दिल्ली में चोरी के कई मामले दर्ज हैं। इसके खिलाफ गाजियाबाद में 9 मामले दर्ज हैं। उक्त मामलों में गाजियाबाद पुलिस को इसकी तलाश थी।