विकास प्रकृति की कीमत पर नहीं होना चाहिए। दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। हालात से निपटने के लिए विकल्प तलाशने की जरूरत है। पर्यावरण कानूनों को अपराध से मुक्त रखने के केंद्र के प्रस्ताव पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने ये बातें कहीं।
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राय ने कहा कि जिन देशों ने विकास की चाह में प्रकृति को नुकसान पहुंचाया, उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। हालात से निपटने के लिए संतुलन बनाए रखने के विकल्पों को तलाशने की जरूरत है। प्रकृति की कीमत पर विकास नहीं होना चाहिए। इससे पर्यावरण की रक्षा करने से जुड़े प्रयासों के लिए तैयार कानूनों पर पानी फेर रहे हैं। बाद में जब प्रकृति आप पर पलटवार करेगी तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भारतीय वन अधिनियम (आईएफए) 1927 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत पेड़ों की कटाई या जंगलों में अतिक्रमण करने पर छह महीने की जेल की सजा को 500 रुपये के जुर्माना में तब्दील करने का प्रस्ताव है। मौजूदा प्रावधानों के तहत कारावास के भय से दूर करने के लिए नियमों के उल्लंघन को अपराधमुक्त करने का प्रस्ताव है। वायु अधिनियम 1981 और जल अधिनियम-1974 के तहत होने वाले उल्लंघन को अपराध से मुक्त करने के लिए संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। ओखला में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के विस्तार के स्थानीय लोगों के विरोध पर राय ने कहा कि यह संयंत्र कचरे के उपचार के लिए बनाया गया।