इन छात्र नेताओं ने भी डूसू से निकलकर बनाई पहचान
डूसू में सहसचिव बनी पूर्णिमा सेठी भी विधानसभा तक पहुंची। 2007 में गौरव खारी नगर निगम पहुंचे तो वहीं, अनिल झा ने भी विधानसभा का सफर तय किया। 1995 में एनएसयूआई के टिकट से डूसू अध्यक्ष बनीं अलका लांबा बाद में आप से विधायक बनीं फिर उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा। 2006 में अध्यक्ष बनीं अमृता धवन ने भी छात्र राजनीति से ही करियर को शुरु किया और पार्षद बनीं। इसी तरह डूसू अध्यक्ष बनीं रागिनी नायक इस समय एआईसीसी की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और एनएसयूआई से 2003 में डूसू अध्यक्ष बनें रोहित चौधरी वर्तमान में एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव हैं।
एबीवीपी के टिकट से 2008 में डूसू अध्यक्ष बनी नुपूर शर्मा विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं, लेकिन जीत नहीं सकीं। वहीं, 2017 में एनएसयूआई के टिकट से अध्यक्ष बने रॉकी राजेंद्र नगर से विधायक का चुनाव जीत नहीं सकें। इसके अलावा भी डूसू से निकले बहुत से छात्र नेताओं ने दिल्ली और देश की राजनीति में अपना जलवा बिखेरा और खूब नाम कमाया है।
चुनाव के लिए संगठन स्तर पर प्रचार शुरू, संभावित प्रत्याशियों ने किया संवाद
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के लिए संगठन सक्रिय हो गए हैं। अभी संगठन स्तर पर प्रचार किया जा रहा है। इसमें छात्र संगठन कहीं कैंपेनिंग अभियान तो कहीं मार्च निकालकर छात्रों से संपर्क साध रहे हैं।
इसी कड़ी में एबीवीपी से डूसू के संभावित प्रत्याशियों ने शुक्रवार को विभिन्न जगहों पर छात्र संवाद का आयोजन कर डीयू में पढ़ने वाले छात्रों की समस्याओं को जाना तथा उनके निराकरण के लिए हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। एबीवीपी दिल्ली के प्रांत मंत्री हर्ष अत्री ने कहा कि एबीवीपी-डूसू ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए 365 दिन काम किया है। इस साल भी हम छात्रों के हित के लिए प्रत्येक कॉलेजों में जा रहे हैं उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं एवं उनसे संवाद स्थापित कर रहे हैं। ब्यूरो