हरियाणा चुनाव की घोषणा होने के बाद से केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने अभियान की कमान संभाल रखी थी। जमानत मिलने के बाद से मनीष सिसोदिया का दखल भी प्रदेश में बढ़ा था। आप के दूसरे नेता भी चुनावी अभियान का हिस्सा थे। फिर भी, पार्टी रणनीतिकारों पर अरविंद केजरीवाल की गैर-मौजूदगी भारी पड़ रही थी। केजरीवाल की जमानत से पूरी पार्टी को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है। माना जा रहा है कि केजरीवाल के हाथ में चुनाव की कमान जाने से संगठन मजबूती के साथ एकजुट होगा। साथ में शीर्ष नेतृत्व के मैदान में होने से नाराज नेताओं की सक्रियता भी बढ़ेगी। इससे आप का चुनावी अभियान तेज होगा।
आप का ज्यादा आक्रामक अभियान भाजपा के खिलाफ दिखेगा
हरियाणा चुनाव में समय कम होने से पार्टी का जोर केजरीवाल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का होगा। इसमें रोड शो व नुक्कड़ सभाओं को कारगर माना जा रहा है। बेहद जरूरी होने पर ही पार्टी बड़ी सभाओं में केजरीवाल को उतारेगी। अपने शीर्ष नेता के जरिये आप कांग्रेस और भाजपा पर हमलावर रहेगी। आप का ज्यादा आक्रामक अभियान भाजपा के खिलाफ दिखेगा। जेल से निकलकर केजरीवाल अपने अभियान को धार देंगे। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि एक-दो दिन में इसकी रणनीति तैयार कर ली जाएगी। इसमें जोर रोड शो पर रहेगा।
दिल्ली चुनाव की तैयारी होगी तेज
विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी दिल्ली में केजरीवाल के होने से आप के चुनावी अभियान में तेजी आएगी। हरियाणा चुनाव के बाद आप का पूरा फोकस दिल्ली पर होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने और एकजुट रखने के लिए केजरीवाल पूरा जोर लगाएंगे। इसमें छोटी-छोटी सभाएं तो होंगी ही, भाजपा के खिलाफ भी केजरीवाल का प्रचार आक्रामक रहेगा।