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दिल्ली: गुरुद्वारा प्रबंधन की जिम्मेदारी किसे मिलेगी संशय बरकरार, सिख राजनीति गरमाई

Mon, 20 Sep 2021 05:49 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर सत्ता हासिल करने के लिए सिख राजनीति गरमा गई है। इंदर मोहन सिंह का कहना है कि एक दर्जन से अधिक याचिकाएं कोर्ट में दाखिल होना सिख समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी
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विस्तार
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव परिणाम आए हुए 25 दिन बीत गए, लेकिन गुरुद्वारा प्रबंधन की जिम्मेदारी किस पार्टी को मिलेगी और अध्यक्ष कौन बनेगा इसे लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। ऐसा पहली बार देखा जा रहा है कि गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय के बावजूद मामला अदालत पहुंच रहा है। एक दर्जन के करीब चुनाव याचिकाएं अदालत में डाली गई।

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गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर सत्ता हासिल करने के लिए सिख राजनीति गरमाई हुई है। सिख राजनीतिक पार्टियां ना केवल आपस में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रही है बल्कि गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय पर भी आरोप मढ़ रही है। बादल गुट ने चुनाव हारने के बावजूद एक्ट में अन्य प्रावधान के हवाले से मनजिंदर सिंह सिरसा को अध्यक्ष बनाने की नीति चली तो सरना गुट ने धार्मिक आधार पर चुनौती दे दी। लिहाजा यह मामला एक बार फिर अदालत में पहुंच गया है। इसी तरह को-आप्शन के तहत दो लोगों की नामजदगी को लेकर भी चुनाव निदेशालय में अभी तक पेंच फंसा हुआ है। यहां तक कि तख्त साहिब के तरफ से भी भेजे गए नाम को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

दिल्ली गुरुद्वारा मामलों के जानकार सरदार इन्दर मोहन सिंह ने कहा कि हाल में संपन्न हुए दिल्ली गुरुद्वारा चुनावों में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान अलग-अलग प्रत्याशियों द्वारा दाखिल किए गए ऐतराजों का संबधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा सही से निबटारा ना करने व गुरुद्वारा चुनाव निदेशक द्वारा उनकी अपीलों को सुनने से इन्कार करने के कारण लगभग एक दर्जन से अधिक मामला अदालतों में है। सिख समाज के लिए यह अति दुर्भाग्यपूर्ण हैं। दिल्ली गुरुद्वारा चुनावों के दौरान इस प्रकार की अपीलों की सुनवाई दिल्ली गुरुद्वारा एक्ट में शामिल है। लिहाजा अदालत के आदेश की प्रतीक्षा किए बिना निर्णय लेना चाहिए। नये कार्यकारी बोर्ड के लंबित अपीलों का निबटारा करें।

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