महिलाओं को आपराधिक वारदात से बचाव और उनकी सुरक्षा के लिए उत्तर पश्चिम जिला की ओर से की गई पहल के परिणाम आने लगे हैं। तेजस्विनी के नाम से शुरू की गई इस पहल में 46 महिला सिपाहियों को संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया था ताकि वह उन इलाकों में रह रही महिलाओं से मिले और उनकी समस्याओं का समाधान कर सके। इस मुहिम के तीन महीना बीतने के बाद महिला पुलिस कर्मियों ने यह साबित कर दिया कि वह जरूरत पडने पर किसी ने कम नहीं है।
तीन माह बाद उसके परिणाम काफी संतोषजनक आए
उत्तर पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त उषा रंगनानी ने बताया कि जिस मकसद से महिला पुलिसकर्मियों को संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया था, तीन माह बाद उसके परिणाम काफी संतोषजनक आए हैं। तेजस्वनी टीम की महिला पुलिसकर्मी हर उम्मीद पर खड़ी उतरी है। उन्होंने बताया कि महिला पुलिसकर्मिंयों ने 116 मामलों का हल किया है। तीन माह के दौरान उन्होंने 137 बदमाशों की धरपकड़ की है। वरिष्ठ नागरिकों और महिलों की 243 मामलों में उनकी सहायता की। इतना ही नहीं महिला पुलिसकर्मियों ने स्कूल कॉलेज की छात्राओं के लिए 13 आत्मरक्षा शिविर आयोजित कर उनमें साहस पैदा किया। इस दौरान 659 छात्राओं ने आत्मरक्षा के गुर सीखे।
सार्वजनिक स्थलों पर घूमकर सुरक्षा की भावना को पैदा की
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि महिला पुलिसकर्मियों ने किस तत्परता से अपना दायित्व का निर्वाह किया इसका उदाहरण है कि जिले में आपराधिक वारदात के पीसीआर कॉल में 23 फीसदी की कमी आई है और महिलाओं की ओर से की जाने वाली पीसीआर कॉल में 31 फीसदी की कमी आई है। टीम ने सार्वजनिक स्थलों पर घूम-घूमकर महिलाओं, लड़कियों और बुजुर्ग के मन में सुरक्षा की भावना को पैदा की। भारत नगर में तैनात एक महिला सिपाही की बहादुरी को देखते हुए स्थानीय लोग महिला सिपाही को आशा की किरण नाम दिया है। किरण ने अकेले ही झपटमार का पीछा कर उसे दबोच लिया था। महिला सिपाही इलाके में बहादुरी मिसाल बन गई है। पुलिस उपायुक्त का कहना है कि तेजस्वनी का दायरा बढाया जा रहा है ताकि अपराध पर अंकुश लगाया जा सके।