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'आपका पोता हमारी हिरासत में है': खुद को पुलिसकर्मी बताकर करते थे ठगी, केस से नाम हटाने की वसूलते थे मोटी रकम

Thu, 04 Jan 2024 07:07 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों से मोटी रकम वसूलते थे। बिहार के चंपारन से दो गिरफ्तार किए हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के साइबर थाना पुलिस ने आरोपियों को दबोचा है।
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दिल्ली में गैंग का खुलासा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आपके पोते को हमने अपहरण के मामले में हिरासत में लिया है। मामले में दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। यदि आप चाहते हैं कि आपके पोते का नाम केस से हटाकर उसे रिहा कर दिया जाए तो उसके बदले आपको रकम चुकाना होगी...। जी हां उत्तर-पूर्वी जिला के साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे ही गैंग का खुलासा किया है।

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गैंग पीड़ित के रिश्तेदार या परिवार के किसी करीबी को आपराधिक मामले में फंसा होने की बात कर उनसे मोटी रकम वसूल लेते थे। आरोपियों ने इसी तरह सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से रकम वसूली थी। रुपये लेने के बाद भी आरोपी और रुपयों की डिमांड कर रहे थे। पुलिस ने गैंग के दो आरोपियों को बिहार के चंपारन से गिरफ्तार किया है।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद नसर अली (24) और मुख्य आरोपी संतोष कुमार यादव (27) के रूप में हुई है। संतोष बिहार पुलिस में संविदा पर टेक्निकल सपोर्ट प्रदान करता है। इसके अलावा वह मर्चेंट नेवी में जाने की तैयारी भी कर रहा है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 15 मोबाइल, 28 सिमकार्ड व अन्य सामान बरामद किया है।
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उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त डॉ. जॉय टिर्की ने बताया कि पिछले दिनों यमुना विहार निवासी बुजुर्ग लक्ष्मी चंद ने साइबर थाना पुलिस को एक शिकायत दी थी। पीड़ित ने बताया कि 24 अक्तूबर को उनके नंबर पर एक व्हाट्सएप कॉल आई। कॉलर ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उनके पोते को गिरफ्तार करने की बात की।

आरोपियों का कहना था कि उनके पोते को अपहरण के मामले में पकड़ा गया है। मामले में पहले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने पोते को छोड़ने के बदले 70 हजार रुपये मांगे। पीड़ित वारदात के बारे में पूछताछ करने के लिए परिजनों को कॉल करते गए, लेकिन उनका नंबर नहीं मिला।

बाद में उन्होंने बातचीत के बाद आरोपियों द्वारा दिए गए पेटीएम नंबर पर 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके चंद मिनटों बाद दोबारा आरोपियों ने कॉल कर दो लाख और मांगना शुरू कर दिया। शक होने पर पीड़ित ने अपने परिवार को कॉल की तो पता चला कि उनका पोता तो घर पर ही मौजूद है।

ऐसे पकड़े गए आरोपी
मामला दर्ज कर उत्तर-पूर्वी जिला साइबर थाना प्रभारी विजय कुमार व अन्यों की टीम ने पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम पंजाब नेशनल बैंक के खाते में लुधियाना पंजाब गई। इसके बाद कई खातों में घूमते हुए रकम बिहार में एटीएम के जरिये निकाल ली गई। पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन का पता किया।

इसके बाद पुलिस ने पहले मो.नसर को चंपारन से गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ के बाद दूसरे आरोपी संतोष कुमार यादव को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से 15 मोबाइल, 28 सिमकार्ड, छह एटीएम व अन्य सामान बरामद कर लिया गया। आरोपियों ने बुजुर्ग से ठगी की बात स्वीकार कर ली।
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कौन हैं पकड़े गए आरोपी
पकड़ा गया आरोपी संतोष परिवार के साथ चंपारन बिहार में रहता है। उसने चेन्नई के एक कॉलेज ग्रेजुएशन किया है। वह मर्चेंट नेवी में जाने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल वह बिहार पुलिस में टेक्निकल सपोर्ट स्टाफ की नौकरी कर रहा है। इसके खिलाफ पहे भी हरियाणा, दिल्ली में तीन मामले दर्ज हैं।

वहीं मो. नसर भी बिहार के चंपारन में रहता है। वह ठगी की वारदात में संतोष का सहयोग करता है। पुलिस पकड़े गए दोनों आरोपियों से पूछताछ कर गैंग के बाकी आरोपियों की पहचान के प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह में कई और लोग शामिल है। उनकी तलाश की जा रही है।
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