बच्चे देश का भविष्य हैं
14 मई को दिए गए आदेश में अदालत ने कहा, 'अपने बच्चों की देखभाल करना और उन्हें यौन दुर्व्यवहार करने वालों के हाथों उनके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक शोषण से बचाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।' इसमें कहा गया कि बच्चे देश का भविष्य हैं और स्वस्थ, विकसित और जीवंत समाज के लिए कमजोर बच्चों के हितों की रक्षा की जानी आवश्यक है।
बचपन में यौन शोषण के मानसिक घाव कभी नहीं मिटते
अदालत ने कहा, 'बचपन में यौन शोषण के मानसिक घाव कभी नहीं मिटते और वे व्यक्ति को हमेशा सताते रहते हैं, जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता है। यौन अपराध दोषी के लिए एक अलग कृत्य हो सकता है, लेकिन यह कृत्य मासूम बच्चे के जीवन को गहराई से प्रभावित करता है।'
पीड़िता को तीन लाख का मुआवजा देना का आदेश
इसके परिणामस्वरूप, दोषी को धारा 10 के तहत सात साल और धारा 12 के तहत तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सजा को वर्तमान में चलाने का आदेश दिया गया। मुआवजे के बिंदु पर अदालत ने पीड़ित प्रभाव रिपोर्ट पर गौर किया, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग कक्षा आठ की छात्रा थी। उसके तीन छोटे भाई-बहन थे और उसकी अकेली मां एक कारखाने में दिहाड़ी मजदूर थी। इसके अलावा लड़की का तपेदिक का इलाज चल रहा था। इसलिए, अदालत ने उसे तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।