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Delhi: बच्ची को अश्लील वीडियो दिखा यौन शोषण करने वाले को जेल, कोर्ट ने कहा- बच्चों को बचाना समाज का दायित्व

Fri, 16 May 2025 06:27 PM IST
श्याम जी. पीटीआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की अदालत ने 2022 में नौ साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के दोषी को सात साल की सजा सुनाई है। वहीं, पीड़िता को तीन लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बच्चों के संरक्षण और यौन शोषण के स्थायी प्रभावों पर जोर दिया।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दिल्ली की एक अदालत ने 2022 में नौ साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में एक व्यक्ति को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा है कि बच्चों की देखभाल करना और उन्हें दुर्व्यवहार करने वालों से बचाना समाज की जिम्मेदारी है। 

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील बाला डागर आरोपी के खिलाफ सजा पर बहस सुन रहे थे, जिसे पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 (गंभीर यौन उत्पीड़न) और 12 (यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था। अतिरिक्त लोक अभियोजक योगिता कौशिक दहिया ने कहा कि दोषी ने नाबालिग पीड़िता के प्राइवेट पार्टस को यौन इरादे से छुआ। साथ ही बच्ची को अश्लील वीडियो दिखाया। इसलिए वह किसी भी सहानुभूति का हकदार नहीं है।

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बच्चे देश का भविष्य हैं 
14 मई को दिए गए आदेश में अदालत ने कहा, 'अपने बच्चों की देखभाल करना और उन्हें यौन दुर्व्यवहार करने वालों के हाथों उनके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक शोषण से बचाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।' इसमें कहा गया कि बच्चे देश का भविष्य हैं और स्वस्थ, विकसित और जीवंत समाज के लिए कमजोर बच्चों के हितों की रक्षा की जानी आवश्यक है।

बचपन में यौन शोषण के मानसिक घाव कभी नहीं मिटते 
अदालत ने कहा, 'बचपन में यौन शोषण के मानसिक घाव कभी नहीं मिटते और वे व्यक्ति को हमेशा सताते रहते हैं, जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता है। यौन अपराध दोषी के लिए एक अलग कृत्य हो सकता है, लेकिन यह कृत्य मासूम बच्चे के जीवन को गहराई से प्रभावित करता है।'

पीड़िता को तीन लाख का मुआवजा देना का आदेश 
इसके परिणामस्वरूप, दोषी को धारा 10 के तहत सात साल और धारा 12 के तहत तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सजा को वर्तमान में चलाने का आदेश दिया गया। मुआवजे के बिंदु पर अदालत ने पीड़ित प्रभाव रिपोर्ट पर गौर किया, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग कक्षा आठ की छात्रा थी। उसके तीन छोटे भाई-बहन थे और उसकी अकेली मां एक कारखाने में दिहाड़ी मजदूर थी। इसके अलावा लड़की का तपेदिक का इलाज चल रहा था। इसलिए, अदालत ने उसे तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
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