दरअसल एंटीजन जांच का इस्तेमाल चिकित्सीय तौर पर नहीं किया जाता है लेकिन हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोविड जांच में परिवर्तन करते हुए यह फैसला लिया है कि जो एंटीजन में संक्रमित मिल रहे हैं उन्हें आरटी पीसीआर कराने की जरूरत नहीं है। जिनमें लक्षण हैं लेकिन एंटीजन जांच की रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो रही है ऐसे रोगियों को आरटी पीसीआर जांच कराना अनिवार्य है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोविड जांच को बढ़ाने के लिए आरटी पीसीआर और एंटीजन दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। चूंकि आरटी पीसीआर की गुणवत्ता अधिक है। इसलिए दिल्ली में रोजाना 60 फीसदी से ज्यादा सैंपल की जांच इस तकनीक से हो रही है।
अब हर मरीज का स्त्रोत पता चलना भी मुश्किल
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में जिस तरह रोजाना हजारों की संख्या में लोग संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक मरीज में संक्रमण का स्त्रोत पता करना काफी मुश्किल है। आशंका है कि राजधानी में रोजाना 35 फीसदी से भी अधिक रोगियों का स्त्रोत नहीं मिल रहा है।
नहीं मिलेगा स्त्रोत तो जल्द नीचे नहीं आएगा ग्राफ
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण का स्त्रोत पता चलना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है और मिसिंग मामले बढ़ते हैं तो समुदाय में संक्रमण का फैलाव अधिक हो सकता है और ऐसी स्थिति में दैनिक मामलों का बढ़ता ग्राफ भी जल्द नीचे नहीं आएगा। अगर राष्ट्रीय राजधानी में मिसिंग बढ़ते हैं तो यह लहर लंबे समय तक रुक सकती है।