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मैली हुई यमुना: शीला सरकार के बाद सफाई पर अब तक नहीं हुआ कोई काम, केजरीवाल कैसे पूरा करेंगे अपना वादा

सार

शहरी मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगाईं ने अमर उजाला को बताया कि यमुना एक्शन प्लान-1 में केंद्र सरकार और जापान के सहयोग से यमुना में गिरने वाले नालों को गिरने से रोकने के लिए 13 एसटीपी बनाने का प्रस्ताव किया गया था। इसी योजना के अंतर्गत राजधानी की सभी कॉलोनियों में सीवर बिछाने और जगह-जगह पर टॉयलेट्स स्थापित करने की योजना बनाई गई थी...
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यमुना में फैला प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को साल 2025 तक यमुना को पूरी तरह साफ-स्वच्छ करने का वायदा किया। उन्होंने कहा कि यमुना 70 सालों में इतनी गंदी हुई है और यह गंदगी दो दिन में साफ नहीं हो सकती। छह एक्शन प्लान के जरिए वे इसे अगले चार सालों में पूरी तरह साफ-स्वच्छ करके दिखाएंगे। लेकिन शहरी मामलों के विशेषज्ञों को केजरीवाल का यह वादा पूरा करना आसान नहीं दिखाई पड़ रहा है। अब तक यमुना सफाई को लेकर आवश्यक तकनीकी, आर्थिक संसाधन और सबसे ऊपर इच्छाशक्ति की कमी को देखते हुए इसे असंभव सा काम माना जा रहा है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद विपक्ष उन पर हमलावर है। भाजपा ने मुख्यमंत्री से पिछले सात सालों में यमुना सफाई के लिए दिल्ली सरकार द्वारा किये गए कामों पर मीडिया के सामने बहस करने की चुनौती दी है।

1993 में हुआ था पहला सार्थक प्रयास

शहरी मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगाईं ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली में प्रदूषित यमुना को साफ करने के लिए 1993 में पहला सार्थक प्रयास किया गया था। यमुना एक्शन प्लान-1 में केंद्र सरकार और जापान के सहयोग से यमुना में गिरने वाले नालों को गिरने से रोकने के लिए 13 एसटीपी बनाने का प्रस्ताव किया गया था। इसी योजना के अंतर्गत राजधानी की सभी कॉलोनियों में सीवर बिछाने और जगह-जगह पर टॉयलेट्स स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। ममगाईं के मुताबिक इस योजना में काफी कार्य हुआ और दिल्ली में जगह-जगह फैली गंदगी में काफी कमी आई थी।

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यमुना एक्शन प्लान-2 में 2005 से 2010-11 के दौरान एसटीपी बनाने और यमुना सफाई के लिए व्यापक योजना बनाई गई थी, लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति और प्राथमिकताओं में शामिल न होने के कारण इस योजना के दौरान कोई विशेष कार्य नहीं हो पाया। इसका परिणाम आज यमुना की गंदगी के रूप में दिखाई पड़ रहा है।  

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस नेता चतर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि शीला दीक्षित सरकार के समय यमुना और राजधानी को साफ रखने के लिए ठोस कार्य किए गए थे। यमुना को गंदे सीवर से बचाने के लिए 13 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की योजना बनाई गई थी। शीला दीक्षित सरकार के समय इनमें से चार एसटीपी को बनाया गया था, लेकिन उसके बाद एक भी एसटीपी नहीं बनाया गया। यदि सभी एसटीपी प्लांट्स समय पर बना दिए जाते तो यमुना की गंदगी का सबसे बड़ा कारण खत्म हो गया होता।

उमा भारती हुईं फेल

शीला दीक्षित सरकार ने वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट में एक जवाब दाखिल कर यमुना सफाई के लिए प्रस्ताव पेश किया था। इसके अनुसार 3150 करोड़ रुपये की लागत से नजफगढ़, अन्य छोटे नालों और शहादरा से बहने वाले नालों पर इंटरसेप्टर सीवर लगाए जाने की बात कही गई थी। यह योजना पांच-छह सालों में पूरी की जानी थी, लेकिन इस योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका और यमुना मैली रह गई।

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2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद केंद्र ने नमामि गंगे योजना के अंतर्गत गंगा-यमुना सफाई को अपनी बड़ी प्राथमिकता बताया था। भाजपा नेता उमा भारती को केंद्र में मंत्री बनाकर उन्हें इन नदियों की सफाई की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उमा भारती ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य करार दिया था, लेकिन बाद में वे इस पर कोई ठोस काम नहीं कर पाईं और बाद में यह जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री नितिन ग़डकरी को सौंप दी गई।

नितिन गडकरी की योजनाओं का यह असर हुआ है कि गंगा पर अनेक जगहों पर साफ-सफाई के ठोस काम हुए हैं और काशी क्षेत्र में गंगा की सफाई का साफ असर दिखाई पड़ रहा है। फिलहाल यमुना के संदर्भ में अभी कुछ ठोस किया जाना बाकी है। दिल्ली में 1700 से अधिक अनधिकृत कालोनियां हैं। इनमें से ज्यादातर में सीवर लाइन की व्यवस्था नहीं है। सरकारी दावों से उलट अनेक जगहों पर अभी भी खुले में शौच किया जाता है। यह सारी गंदगी भी यमुना तक पहुंचती है जो इसे विषैला बनाती है।

सामना करें केजरीवाल

दिल्ली भाजपा नेता आनंद त्रिवेदी ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाया कि यमुना सफाई के नाम पर दिल्ली सरकार को केंद्र से भारी आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। पिछले सात सालों में केंद्र ने यमुना सफाई के लिए दिल्ली सरकार को 2345 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने पर्यावरण टैक्स के नाम पर लोगों से 1439.65 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन सरकार ने यमुना सफाई और पर्यावरण बचाने के लिए कोई काम नहीं किया। इसी का परिणाम है कि आज यमुना नाला बनकर रह गई है, तो दिल्ली को धुएं वाली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

भाजपा ने अरविंद केजरीवाल को खुली चुनौती दी है कि वे 24 नवंबर को एनडीएमसी सेंटर पर आएं और मीडिया के सामने यमुना सफाई के लिए अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी दें। इस दौरान दिल्ली के सभी भाजपा सांसद, नगर निगम अधिकारी और आम आदमी पार्टी के सभी विधायक उपस्थित रहें।

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