नोएडा के सोरखा गांव में स्थित एक स्कूल में 14 वर्षीय छात्रा की कथित रूप से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
मृतका के परिजनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा था। परिजनों का आरोप था कि तीन जुलाई 2020 को नोएडा के सेक्टर 115 में सोरखा गांव में स्थित आर्य कन्या गुरुकुल वैदधाम की कक्षा में उनकी बेटी का शव लटका मिला था जहां वह पढ़ने जाती थी। संस्थान कोई जयेंज्र आचार्य और उसकी पत्नी संचालित करते थे।
किशोरी के परिजनों का आरोप था कि आचार्य ने उनकी बेटी की मौत की जानकारी दिए बिना उन्हें गुरुकुल में बुलाया था। उनके पहुंचने पर आचार्य और उसकी पत्नी ने अज्ञात बदमाशों की मदद से उनके फोन व अन्य सामान छीन लिया था जिससे वे कोई फोटो ना ले सकें। इसके बाद आरोपी उन्हें कक्षा में ले गए थे जहां उनकी बेटी लटकी हुई थी।
इस संबंध में हरियाणा पुलिस ने घटना के छह दिन बाद नौ जुलाई 2020 को व यूपी पुलिस ने घटना के 14 दिन बाद 17 जुलाई 2020 को दो अलग-अलग केस दर्ज किए थे।
हरियाणा और यूपी में कोई कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता के पिता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली थी। उन्होंने हरियाणा में अगवा करने का जबकि यूपी में कथित रूप से दुष्कर्म व हत्या का मामला दर्ज कराया था। परिजनों ने कहा कि उनकी बेटी का शव जिस हालत में मिला था उससे पता चलता था कि उसके साथ दुष्कर्म और हत्या की गई है।
एफआईआर के अनुसार, आचार्य ने पुलिस को सूचित किए बिना शव को जबरन अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया था और बाद में जिस कमरे में शव मिला था, वहां केस से जुड़े सभी सबूत जैसे लड़की की चप्पलें व दुपट्टा नष्ट करने के लिए हवन कराया था।
पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया कि बिना पुलिस को बुलाए या शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे उन्हें कक्षा के अंदर नहीं जाने दिया गया और उनसे जबरन खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि घर के सभी सदस्यों को एक गाड़ी में बंद कर हरियाणा स्थित उनके गांव भेज दिया गया। उनके साथ भेजे गए बदमाशों को निर्देश दिया गया था कि गाड़ी उनके घरों पर ही रोकी जाए।
पीड़िता के परिजनों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अजय रस्तोगी व जस्टिस सीटी रवि कुमार की पीठ ने इसी साल अप्रैल में उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वे केस से संबंधित सभी दस्तावेज चार सप्ताह के अंदर सीबीआई को सौंप दें।