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बजट से भाजपा को राहत कम, आफत ज्यादा!

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राजधानी के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति शासन में दिल्ली का बजट विधानसभा की जगह लोकसभा में पेश हुआ।
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इसमें चुनाव से पहले पेश किए जाने वाले बजट में कई तरह के राजनीतिक हित साधने के आंकड़े भी पेश हुए, लेकिन यह भाजपा के लिए राहत के साथ विपक्ष से कुछ आफत भी लेकर आएगा।

वित्त मंत्री ने कोई नया कर न लगाकर योजना मद में पहली बार 17,700 करोड़ रुपये का प्रावधान करने के अलावा हर क्षेत्र में पर्याप्त घोषणा की है, लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बिजली बिलों पर भाजपा घिरने वाली है। इसमें कई पुरानी घोषणाएं भी शामिल हैं।
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'भाजपा ने जनता को धोखा दिया'

‘आप’ ने इसकी तैयारी भी तेज कर दी है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि बिजली सब्सिडी के नाम पर जनता से भाजपा ने धोखा दिया है। वह बिजली आंदोलन के जरिए लोगों को सच्चाई से अवगत कराएगी।

भाजपा राजधानी में सरकार बनाने की कवायद में जुटी हुई है, लेकिन इसके लिए जोड़तोड़ की राजनीति को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

तोड़े जाने वाले विधायक कांग्रेस व ‘आप’ दोनों के हो सकते हैं, लेकिन सब इंतजाम कर चुकी प्रदेश भाजपा की योजना पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व को ही लेना है। ऐसे में लोगों की नजरें बृहस्पतिवार को बिजली के दामों में वृद्धि के बाद केंद्र सरकार के दिल्ली बजट पर थीं।

तीनों पार्टियां उठा रही हैं फायदा!

भाजपा के वरिष्ठ नेता जगदीश मुखी की तरफ से बिजली बिलों में राहत के लिए 800 करोड़ रुपये की सब्सिडी की मांग की गई थी।

दरअसल, वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शीला सरकार पर महंगी बिजली का आरोप लगाते हुए बिलों को 30 फीसदी कम करने की बात कही थी, जबकि ‘आप’ ने बिलों को आधा करने का वादा किया था। सरकार बनने पर ‘आप’ ने बिजली बिल में 50 फीसदी तक सब्सिडी दी।

अब प्रदेश भाजपा की कोशिश थी कि बिजली बिलों पर इतनी ही राहत रहे जितनी ‘आप’ ने दी थी। इससे कम राहत पर कांग्रेस कह सकती है कि यह तो वो भी दे रहे थे, जबकि ‘आप’ महंगी बिजली का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेगी।
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'घोषणापत्र नुमा है बजट, लाभ नहीं होगा'

राजनैतिक विश्लेषक अभय दुबे का कहना है कि बजट घोषणापत्र नुमा ही है। ऐसे बजट पर डिबेट होनी चाहिए कि जनता को लाभ कब पहुंचेगा।

उन्होंने कहा कि अब सरकार बनाने की कोशिश से भाजपा इसलिए पीछे हट सकती है क्योंकि जोड़तोड़ की राजनीति के बीच काफी बदनामी झेलनी होगी। ऐसे में चुनाव में जाने को लेकर इस बजट से फायदा लेने की कोशिश हो सकती है।
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