| मद |
मौजूदा |
प्रस्तावित |
अंतर |
| अग्रिम यात्रा भत्ता |
4,00,000 |
8,00,000 |
4,00,000 |
| कंप्यूटर/लैपटाप |
- |
1,00,000 |
1,00,000 |
पेंशन: सालाना मिलने वाली पेंशन 7500 से 15000 कर दी गई है।
दिल्ली सरकार ने सबसे पहले तीन दिसंबर 2015 में विधायकों के वेतन और भत्तों में संशोधन को विधेयक केंद्र सरकार को भेजा था। उसमें विधायकों का बेसिक 12 हजार से बढ़ाकर 50 हजार किया गया था। वहीं, भत्ते के साथ यह आंकड़ा 2.10 लाख बैठ रहा था। उस वक्त प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूर नहीं किया। केंद्र का कहना था कि वेतन वृद्धि का प्रस्ताव नियम संगत नहीं है। इस बारे में केंद्र ने दिल्ली सरकार को कुछ सुझाव भी दिए थे। अब इसे संशोधित कर दुबारा सदन में पास किया है। वेतन पर चर्चा शुरू करने के दौरान विधायक विशेष रवि ने कहा कि यह दुखद है कि सात साल बाद केंद्र सरकार दिल्ली के विधायकों का दर्द समझा।
विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि 1993-2011 तक विधायकों की सैलरी पांच बार बढ़ी। यानी साढ़े तीन साल में वृद्धि हुई। इस बार 11 साल बाद विधायकों की सैलरी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पे-कमीशन के रिपोर्ट के आधार पर विधायकों की सैलरी बढ़नी चाहिए। संसद ने तो यह नियम लागू भी कर लिया है।
विधानसभा सदस्यों ने डाटा एंट्री ऑपरेटरों की संख्या दो से बढ़ाकर चार करने की मांग रखी। इसके साथ ही वाहन खरीदने पर रेट ऑफ इंट्रेस्ट को भी जीरों प्रतिशत विधायकों के लिए करने की मांग विधानसभा अध्यक्ष से की। भाजपा विधायक अनिल वाजपेयी ने पेंशन राशि 7500 को बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने की मांग की। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सदन में सुरक्षा व अन्य कामों के लिए सिविल डिफेंस की मांग की।