आम आदमी पार्टी भी इसमें पीछे नहीं है। आप ने करीब दर्जन भर ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है जिनकी जड़ें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार या झारखंड से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इस बात की बहुत संभावनाएं हैं कि इस बार पूर्वांचली वोट तीनों ओर बंट जाएंगे।
अगर पंजाबी वोटरों की बात करें तो वे दिल्ली की 25-28 विधानसभा सीटों के नतीजों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। दिल्ली में पंजाबी बाग, तिलक नगर, जनकपुरी, विकास पुरी, करोल बाग, पटेल नगर, ओल्ड रजिंदर नगर, न्यू रजिंदर नगर, मोती नगर, रजौरी गार्डन, नारायणा, माया पुरी, हरिनगर, सुभाष नगर, महारानी बाग, लाजपत नगर, मालवीय नगर, कालकाजी और शाहदरा ऐसे इलाके हैं जहां पंजाबी वोटरों की संख्या निर्णायक है।
अबतक भाजपा दिल्ली में अकाली दल के साथ चुनाव लड़ती थी। 2013 के चुनावों में अकाली दल को दो सीट मिले थे, लेकिन इस बार अकाली दल ने भाजपा के साथ गणबंधन से इंकार कर दिया है। अकाली दल के इस कदम से भाजपा को फायदा भी हो सकता है। जहां तक मुस्लिम वोटों की बात है, तो वे दिल्ली में 12 प्रतिशत की संख्या में हैं। भाजपा को नागरिकता कानून के बाद इन मतदाताओं से कम ही समर्थन की उम्मीद है।
अब ऐसे में जब पूर्वांचली वोट तीन हिस्सों में बंट जाएंगे और मुस्लिम वोट पूरी तरह भाजपा के खिलाफ नजर आ रहे हैं, तो एक पंजाबी वोटर ही हैं जिनकी मदद से दिल्ली विधानसभा चुनाव में पासा पलट सकता है।