मामला दर्जकर ग्रेटर कैलाश-1 थानाध्यक्ष अजीत कुमार की देखरेख में एसआई अनिल व हवलदार ललित की टीम ने जांच शुरू की। पता लगा कि आरोपी ने मोबाइल नंबर फर्जी नंबर से ले रखा था। उसने बुजुर्ग से जिस बैंक में पैसे मंगवाए थे वह भी फर्जी आईडी से खुलवाया हुआ था। आखिरकार पुलिस टीम ने आरोपी वीरेंद्र साहनी को 18 जुलाई को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया।
उसके बाद से एक लग्जरी कार, 15 लाख की डायमंड ज्वेलरी, 25 लाख की कीमत के शेयर, चार एटीएम, एक मैकबुक व आईफोन बरामद किया गया है। आरोपी के बैंक खाते में 2.5 लाख रुपये है। बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया है।
आरोपी को नेट बैंकिंग की अच्छी जानकारी है
मूलरूप से गोरखपुर के संग्रामपुर गांव का रहने वाला वीरेंद्र साहनी 12वीं पास है। उसे नेट बैकिंग की अच्छी जानकारी है। वह वर्ष 2008 में दिल्ली आया था और रियालंस मोबाइल के सिम कार्ड डीलर के रूप में काम करने लगा। इसके बाद वह विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों के लिए डाटा एकत्रित करने वाली कंपनी नेट अमबिट में काम करने लगा। यहां इसने कॉल सेंटर शुरू किया।
यहां काम कर ये सीख गया कि लोगों से उनकी व्यक्तिगत जानकारी कैसे ली जाती है। आरोपी सीनियर सिटीजंस से उनके खाते में इंश्योरेंस का बोनस जमा कराने के बहाने उनकी जानकारी ले लेता था। इसके बाद नेट बैकिंग व अन्य तकनीकी माध्यमों से खाते का पासवर्ड, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर आदि बदलकर बैंक खाते पर कब्जा कर लेता था। आरोपी बैंगलुरु के देसी राजू सुंद्रा (72) से 50 लाख व गुजरात के इंद्रबदन जावेद भाई पटेल से 20 लाख रुपये की ठगी कर चुका है।