गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ में खुलासा किया कि वे एक अंतरराज्यीय मादक सिंडिकेट का हिस्सा थे। शाहनवाज ने बताया कि वह पिछले 03-04 वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों में लिप्त है। वह मणिपुर के एक रज्जाक से या अपने वाहन के माध्यम से इसकी डिलीवरी लेने के बाद हेरोइन का परिवहन करता था।
वह रज्जाक से हेरोइन खरीदने के लिए अपने ट्रक में मणिपुर और असम के पहाड़ी इलाकों विशेषकर गुवाहाटी तक यात्रा करता था। शाहनवाज ने यह भी खुलासा किया कि पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को धोखा देने के लिए उसने अपने ट्रक एक विशेष गुप्त जगह बना रखी थी।
कभी-कभी मात्रा अधिक होने पर वह हेरोइन के कुछ पैकेट ट्रक के केबिन में छिपा देता था। इसके बाद, वह इसे यूपी और दिल्ली/एनसीआर क्षेत्रों में विभिन्न व्यक्तियों/संपर्कों तक पहुंचाता है।
सचिन ने यह भी खुलासा किया कि वह अपने वाहक शाहनवाज हुसैन के माध्यम से मणिपुर के रज्जाक से हेरोइन की खरीद करता था और आगे दिल्ली / एनसीआर के विभिन्न ड्रग पेडलर्स को इसकी आपूर्ति करता था।
आरोपी अब्दुर रज्जाक ने खुलासा किया कि उसे म्यांमार से भारी मात्रा में कच्ची हेरोइन की खेप मिलती थी। उन्होंने विशेष रूप से खुलासा किया कि मणिपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों और म्यांमार की सीमाओं के साथ-साथ अफीम की व्यापक रूप से अवैध खेती होती है।
चूंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में बाड़ नहीं है और सीमा रेखा के साथ घने जंगल मौजूद हैं, इसलिए मणिपुर के आपूर्तिकर्ता आसानी से सीमा पार कर जाते हैं और म्यांमार में अपने आपूर्तिकर्ताओं से कच्ची हेरोइन की खरीद के लिए म्यांमार में प्रवेश करते हैं।
गुणवत्ता के कारण मांग है
म्यांमार की कच्ची हेरोइन बेहतर गुणवत्ता की है और भारत में निर्मित हेरोइन से भी सस्ती है। यही कारण है कि म्यांमार में उत्पादित हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक मांग है। उन्होंने आगे खुलासा किया कि वह पार्टियों से मिलने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए एयर द्वारा आते थे और बाद में अपने वाहन के माध्यम से खेप भेजते थे। वह अपने वाहकों के माध्यम से नशीले पदार्थों की डिलीवरी के लिए नई पार्टियों से मिलते रहते हैं और इस तरह वह लगातार अपने कार्टेल का विस्तार कर रहे थे।