वातावरण, प्रदूषण और बदले खानपान की वजह से कई दवाएं अब बेअसर होने लगी हैं। शरीर में बैक्टीरिया ऑटो इम्यून होने लगे हैं। इसकी वजह से कई ऐसी दवाएं हैं जिनकी कम पावर की डोज अब असर नहीं कर रही।
दरअसल, भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हल्की सी भी परेशानी नहीं झेलना चाहते और हल्के सर्दी जुकाम और सिर दर्द में अंधाधुंध एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। ऐसे लोगों पर हल्के पावर की दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।
इसकी वजह से दवा कंपनियों ने कम पावर वाली दवाओं केडोज बढ़ाकर बाजार में उतारे हैं। जैसे पैरासिटामोल पहले 500 एमजी के मिलते थे, अब 650 एमजी की दवा मार्केट में उपलब्ध है।
डा. प्रहलाद चावला ने बताया कि बैक्टीरिया के खिलाफ बनने वाले सुरक्षा कवच के प्रति बैक्टीरिया ऑटो इम्यून हो जाते हैं। इसकी वजह से कम पावर की दवाएं बेअसर होने लगती हैं। उन्होंने बताया कि साधारण सर्दी-जुकाम या सिर दर्द में एंटीबायोटिक दवाएं नहीं लेनी चाहिए।
इन दवाओं की बढ़ाई गई पावर
लिवोफ्लोक्सिन पहले 250 फिर 500 अब 750 एमजी की आने लगी
पैरासिटामोल पहले 500 अब 650 एमजी
एमोसिक्सिलिन ताल्वोनेट पहले 625 अब हजार एमजी
ओफ्लोक्सिन पहले 100 फिर 200, 300 और 400 एमजी की
सिफिक्सिएन पहले 50 फिर 100 अब 200 एमजी
गैरिफ्लोक्सिन पहले 125 फिर 250 अब 300 एमजी
ऐसे इंप्रूव करे इम्यूनिटी
जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है वह जल्दी बीमार पड़ते हैं और बीमारी से उबरने में भी समय लगता है। आयुर्वेदाचार्य आर के आर्य ने बताया कि आसन, योग और ध्यान से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा संतरा, तुलसी के पत्ते, अंकुरित अनाज और गिलोय का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।