सुप्रीम कोर्ट वृहस्पतिवार को दिल्ली में अफसरों पर नियंत्रण और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के अधिकार क्षेत्र जैसे मसलों पर अपना फैसला सुना रहा है। गत वर्ष एक नवंबर को न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस सीकरी के बीच में सर्विसेज को लेकर मतभेद है। पढ़ें दोनों जजों ने अपने फैसले में क्या-क्या कहा...
कोर्ट में दोनों जजों के फैसले की बड़ी बातें
सचिव स्तर के अधिकारियों पर फैसला एलजी करें- जस्टिस सीकरी
दानिक्स स्तर के अधिकारियों पर फैसला एलजी की सहमति से हो- जस्टिस सीकरी
अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई राष्ट्रपति करें- जस्टिस सीकरी
एसीबी केंद्र के अधिकारियों पर एक्शन नहीं ले सकता- जस्टिस सीकरी
निदेशक स्तर की नियुक्ति सीएम कर सकते हैं- जस्टिस सीकरी
लैंड का सर्कल रेट दिल्ली सरकार तय कर सकती है- जस्टिस सीकरी
सर्विस(अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग) पर मैं सहमत नहीं- जस्टिस भूषण
मालूम हो कि गत वर्ष चार जुलाई को संविधान पीठ द्वारा दिल्ली बनाम उपराज्यपाल विवाद में सिर्फ संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या की थी। संविधान पीठ ने कहा था कि कानून व्यवस्था, पुलिस और जमीन को छोड़कर उपराज्यपाल स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते।
उस फैसले में कहा गया था कि उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार की सलाह पर काम करना होगा और अगर किसी मसले पर सरकार और उपराज्यपाल के बीच विवाद हो जाए तो उपराज्यपाल उसे राष्ट्रपति को रेफर करेंगे। इस फैसले केबाद दिल्ली सकरार ने कहा था कि संविधान पीठ केफैसले केबाद भी कई मसलों पर गतिरोध कायम है।