- एशियन पार्लियामेंट्री डिबेट के समापन समारोह में पहुंचे सांसद अनुराग ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के लॉ फैकल्टी के फाइव-ईयर इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स की ओर से अभिव्यक्ति: एशियन पार्लियामेंट्री डिबेट के पहले संस्करण का समापन समारोह हुआ। इस अभिव्यक्ति कार्यक्रम में देशभर के 50 से अधिक कॉलेज और विश्वविद्यालयों ने हिस्सा लिया था। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारतीय ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा में शास्त्रार्थ का बहुत महत्व है। शास्त्रार्थ एक भारत श्रेष्ठ भारत का भी सबसे बड़ा जरिया है।
शास्त्रार्थ की परंपरा केवल ऋषियों-मुनियों तक सीमित नहीं थी। मनुष्यों और देवताओं के बीच में भी शास्त्रार्थ हुए हैं। कहा कि विकसित भारत 2047 संकल्प से सिद्धि की इस यात्रा को अगले दो दशकों में पूरा करना है।
ओपिनियन और फैक्ट में फर्क करना सीखें छात्र
डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि छात्र ओपिनियन और फैक्ट में फर्क करना सीखें। फैक्ट के लिए मेहनत करनी पड़ती है उसके लिए पढ़ना पड़ता है, सोर्स तक जाना पड़ता है। डिबेट के तीन नियम हैं प्रमाण दो, तर्क दो और हार को स्वीकार करो। डिबेट में असहमति के महत्व पर कुलपति ने बताया कि भारतीय संविधान को बनाने में दो वर्ष लगे, अगर सभी एक दूसरे से सहमत होते क्या इतना समय लगता। इसी का प्रतिफल है कि इतना अच्छा संविधान हमारे सामने है। इस अवसर पर साउथ कैंपस की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता, लॉ फैकल्टी की डीन प्रो. अंजू सहित फैकल्टी, छात्र और कानूनी पेशेवर उपस्थित रहे।