क्या मौत के बाद कोई शख्स किसी को पत्र लिख सकता है। एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने मौत के छह साल बाद डीडीए को पत्र लिखा और प्लॉट पर निर्माण अवधि बढ़ाने की अनुमति मांगी।
इतना ही नहीं, डीडीए ने पत्र पर विचार करने के बाद अवधि भी बढ़ा दी और शुल्क जमा कराने के लिए कहा। मृतका की बड़ी बहन को जब यह पत्र मिला तो उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ।
उन्होंने छानबीन की तो डीडीए अधिकारियों का फर्जीवाड़ा सामने आया।
बहन के साथ रहती थी अनीता
पेश मामला रोहिणी सैक्टर 24 में डीडीए के साठ मीटर के प्लॉट से जुड़ा है। यह प्लॉट डीडीए ने 1996 में अनीता इसरानी को आवंटित किया था।
अनीता इस प्लॉट पर कोई निर्माण कर पातीं या किसी को देतीं, इससे पहले ही दस जनवरी 2002 को गंगा राम अस्पताल में उनकी मौत हो गई। वह अविवाहित थीं और पश्चिम विहार में अपनी बड़ी बहन मीना माथुर के साथ रहती थीं। मामले में पुलिस को 24 जुलाई को रिपोर्ट पेश करनी है।
अदालती आदेश पर हुई एफआईआर
अदालत ने मामले की शिकायतकर्ता मीना माथुर की याचिका पर सुनवाई के बाद एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
पुलिस ने डीडीए वाइस चेयरमैन, उप-निदेशक लैंड एंड बिल्डिंग व सुनीता देवी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, गलत पहचान बनाने व आपराधिक साजिश की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।
इसके बाद अदालत ने शिकायतकर्ता के आवेदन पर पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश गत 27 मार्च को दिया था। पुलिस को इस मामले में 24 जुलाई को रिपोर्ट पेश करनी है।
डीडीए के पत्रों से खुला फर्जीवाड़ा
मृतका की बहन को फर्जीवाड़े का पता तब चला जब उन्हें नवंबर व दिसंबर 2008 में डीडीए की ओर से दो पत्र मिले।
छानबीन करने पर उन्हें पता चला कि किसी महिला ने डीडीए अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर उनकी बहन अनीता के नाम से पत्र व्यवहार किया है और उसके प्लॉट को हड़पना चाहती हैं।
मीना माथुर को गहराई में जाने पर पता चला कि वह महिला सोनीपत की रहने वाली है, लेकिन डीडीए के रिकार्ड में इस महिला का पता अनीता के प्लॉट का ही है। मीना माथुर का आरोप है कि डीडीए अधिकारियों ने दस्तावेजों में हेरफेर कर दिया। अब आरोपी महिला खुद को प्लॉट की मालकिन बता रही है।