-यह जानकारी डीडीए द्वारा दाखिल काउंटर एफिडेविट में दी गई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। संगम विहार के खसरा नंबर 134 की विवादित जमीन को लेकर चल रहे मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया है कि जमीन अब नगर निगम (एमसीडी) को सौंप दी गई है। जानकारी डीडीए द्वारा दाखिल काउंटर एफिडेविट में दी गई। डीडीए के अनुसार, यह जमीन 19 फरवरी 2021 को ग्राम सभा, दिल्ली सरकार से जैसी है वैसी आधार पर डीडीए को हस्तांतरित की गई थी। बाद में एमसीडी ने 21 जून 2024 को यहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यानी कचरा प्रबंधन सुविधा स्थापित करने के लिए आवेदन किया था।
इसके बाद 28 अगस्त 2024 को एमसीडी, डीडीए और अन्य संबंधित अधिकारियों ने संयुक्त रूप से साइट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद 4 सितंबर 2024 को डीडीए ने एमसीडी को जमीन का औपचारिक हैंडओवर करने के लिए पत्र जारी किया। वहीं, 24 अक्तूबर 2024 को दोनों विभागों के अधिकारियों और दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में जमीन एमसीडी को सौंप दी गई। डीडीए ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि खसरा नंबर 134 का कुल क्षेत्रफल 12,575 वर्ग मीटर है। इसमें से करीब 25 प्रतिशत यानी लगभग 4,191 वर्ग मीटर हिस्सा प्राकृतिक नाले (खल) का है। डीडीए ने कहा कि बाकी जमीन पर एमसीडी कचरा प्रबंधन सुविधा बना सकती है, लेकिन नाले को किसी भी तरह से बंद या प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
डीडीए ने यह भी कहा कि उसने इस जमीन पर कोई कचरा या मलबा नहीं डाला और न ही किसी अवैध कब्जे की अनुमति दी। अब इस जमीन की पूरी जिम्मेदारी एमसीडी की होगी। मामले में डीडीए ने एनजीटी के सामने खसरा नंबर 134 की मौजूदा स्थिति की तस्वीरें भी पेश की हैं। यह मामला स्थानीय निवासी प्रेम चौहान द्वारा एनजीटी में दायर याचिका के बाद सामने आया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि संगम विहार स्थित प्राकृतिक नाले को कचरे और मलबे से भर दिया गया है।