फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में अपनी कला का प्रदर्शन करने आए नॉर्थ ईस्ट के शिल्पकार और कलाकार दिल्ली में उनके लोगों के साथ होने वाली घटनाओं से काफी आहत हैं।
मेले में नॉर्थ ईस्ट से आए शिल्पकारों ने दिल्ली को लेकर जमकर अपनी भड़ास निकाली। असम से आए शिल्पकार कुमुद कलिता व मोनोस कलिता ने कहा कि अपने ही देश की राजधानी में नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ होने वाली घटनाओं की जिम्मेदार सरकार है।
कुमुद का कहना है कि नॉर्थ ईस्ट में जो लोग हिंदीभाषियों की हत्या करते हैं वह कट्टरपंथी हैं न कि आम आदमी।
नागालैंड के दीमापुर की रहने वाली अभिनो व कोहिमा की अनील्यू शिल्पकार ने कहा कि वह व्यापार के सिलसिले में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व साउथ के राज्यों में जाती हैं लेकिन दिल्ली जैसा व्यवहार कहीं नहीं होता। दिल्ली के लोग चाइनीज व नेपाली कहकर गाली देते हैं।
लड़कियों को चिंकी कहकर पुकारा जाता है। छेड़खानी और बदसलूकी तो आम बात है। मणिपुर के रहने वाले याओसी व कैंसी का कहना है कि इन घटनाओं से लगता है कि दिल्लीवालों में दिल है ही नहीं। अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर के रहने वाले टगैछई ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के लोग अपनी लड़कियों को दिल्ली भेजना पसंद नहीं करते। केंद्र सरकार की नौकरियों की तैयारी और नौकरी के लिए भेजना मजबूरी हो जाती है।
नौकरी देने से खत्म होगा भेदभाव
नॉर्थ ईस्ट के लोगों का कहना है कि सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में पूर्वोत्तर के लोगों की संख्या कम होने से नस्लवाद को बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र सरकार ऐसी पॉलिसी बनाए, जिससे वहां के लोगों को भी सरकारी नौकरियों के अवसर मिले।