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Delhi NCR News: करोड़ों खर्च, बैठकों पर बैठकें... फिर भी बारिश से पहले नहीं बदली तस्वीर, फिर डूबेगा नूंह

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पड़ताल-
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हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी बारिश आते ही पानी-पानी हो जाता है नूंह
कागजों में सफाई पूरी, जमीन पर गंदगी बरकरार, मानसून सिर पर, ड्रेनेज व्यवस्था बेअसर
दिनेश देशवाल
नूंह। मानसून की दस्तक से पहले नूंह शहर में जलभराव रोकने के दावे एक बार फिर कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री स्तर तक कई बैठकें हुईं, करोड़ों रुपये के बजट स्वीकृत हुए, नालों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के निर्देश जारी किए गए, लेकिन सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल के दौरान जमीनी हकीकत यह है कि शहर आज भी पहली तेज बारिश का इंतजार नहीं, बल्कि उससे होने वाली परेशानी का इंतजार कर रहा है। अधूरे पड़े नाले, गंदगी से अटे ड्रेन और जगह-जगह टूटी नालियां साफ बता रही हैं कि इस बार भी नूंह के लोगों को जलभराव की मुसीबत से राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।

प्रशासन ने 15 जून तक सभी प्रमुख नालों की सफाई और मरम्मत पूरी करने के निर्देश दिए थे। नगर परिषद ने इसके लिए लाखों रुपये के टेंडर भी जारी किए, लेकिन शहर में हालात जस के तस बने हुए हैं। कई प्रमुख नालों में अब भी कचरा भरा पड़ा है और कई स्थानों पर नालियां टूटी हुई हैं। ऐसे में यदि लगातार बारिश हुई तो शहर के कई हिस्सों का पानी निकलना मुश्किल हो जाएगा।
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हर साल की तरह इस बार भी विष्णु कॉलोनी, हिंदू हाई स्कूल के पीछे की कॉलोनी, वार्ड-1, 2 और 12, पलड़ी रोड, वाईएमडी कॉलेज, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, महिला थाना, रेडक्रॉस भवन, गौशाला रोड, मुख्य बाजार, पुरानी अनाजमंड़ी, नए बस स्टेंड के सामने सर्विस रोड और आसपास के इलाके जलभराव के सबसे बड़े केंद्र बन सकते हैं। स्थानीय निवासी आसिफ अली चंदेनी, डाॅक्टर मकसूद अहमद, राकेश बघेल, गोपाल पंड़ित, एडवोकेट शमीम अहमद, मुस्ताक, प्रवीण शर्मा, मास्टर पंकज शर्मा, नेहा सिंह आदि का कहना है कि हल्की बारिश में ही सड़कें तालाब बन जाती हैं और घरों व दुकानों तक पानी पहुंच जाता है।
अधूरा नाला बढ़ाएगा परेशानी:
शहर की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना भी लोगों की चिंता बढ़ा रही है। पुराने दिल्ली-अलवर रोड पर नगर परिषद कार्यालय से लेकर एनएच-248ए तक बनाया जा रहा नाला करीब एक वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। इसी नाले के जरिए शहर का बरसाती पानी एनएच-248ए के किनारे बने नाले से होकर जोगीपुर स्थित चंदेनी ड्रेन तक पहुंचाया जाना है। लेकिन निर्माण कार्य अधूरा रहने से इस मानसून में भी इसका लाभ मिलने की संभावना नहीं दिख रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह नाला समय पर पूरा नहीं हुआ तो जलभराव की स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर हो सकती है।
टूटे नालों की नहीं हुई मरम्मत:
उधर, एनएच-248ए, नूंह-पलवल स्टेट हाईवे, पलड़ी रोड, तावडू रोड और होडल रोड के किनारे बने नाले भी गंदगी से पटे हुए हैं। कई जगहों पर नालों की दीवारें टूट चुकी हैं और बिना बारिश के ही गंदा पानी सड़कों पर बहता दिखाई देता है। इससे न केवल जलनिकासी प्रभावित हो रही है, बल्कि लोगों को दुर्गंध और संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।
22 लाख से निकलेगा पानी:
दिलचस्प बात यह है कि नालों की सफाई पर अलग से खर्च होने के बावजूद नगर परिषद ने शहर से पानी निकालने के लिए करीब 22 लाख रुपये का टेंडर भी जारी किया है। इसके तहत पंपसेट, ट्रैक्टर माउंटेड पंप और मोटरों के जरिए जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालकर चंदेनी ड्रेन तक पहुंचाया जाएगा। पिछले वर्ष भी इसी व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद शहर कई दिनों तक पानी में डूबा रहा। ऐसे में इस बार भी लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि जब हर साल लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं तो स्थायी समाधान आखिर कब मिलेगा?

पीडब्ल्यूडी के एसडीओ तापेश कुमार का कहना है कि महिला थाना परिसर में जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाए जा रहे टैंक के कारण नाले का निर्माण रुका हुआ है। टैंक और पाइपलाइन का काम पूरा होते ही अधूरे नाले का निर्माण भी जल्द पूरा कर दिया जाएगा।
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वहीं नगर परिषद के चेयरमैन संजय मनोचा का दावा है कि बरसात से पहले नालों की सफाई, मरम्मत और अधूरे निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए अस्थायी पाइपलाइनें भी बिछा दी गई हैं और जरूरत पड़ने पर पंपसेट के माध्यम से पानी चंदेनी ड्रेन तक पहुंचाया जाएगा।
फोटो: पुराने दिल्ली-अलवर रोड के साथ बनने वाला नाला पड़ा अधूरा।
फोटो: नूंह-पलवल स्टेट हाईवे के साथ बने नाले की टूटी दिवारें।
फोटो: पुराने दिल्ली अलवर रोड के साथ मुख्य बाजार में गंदगी से भरा हुआ नाला।
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