नौंवी कक्षा में फेल होने पर एक छात्रा ने बृहस्पतिवार सुबह घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। श्यामपार्क एक्सटेंशन निवासी छात्रा रिजल्ट आने के बाद से परेशान थी। बृहस्पतिवार को घर में उसने फंदा लगा लिया।
पुलिस को घटनास्थल से सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में पुलिस इसे फेल होने से परेशान होकर आत्महत्या का मामला मान रही है।
श्यामपार्क एक्सटेंशन ए ब्लाक निवासी नंद किशोर यहां पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते हैं। वह मोहननगर स्थित एक कंपनी में कार्यरत हैं। बृहस्पतिवार सुबह नंद किशोर फैक्ट्री गए थे।
इस दौरान घर में उनका बेटा नितीश और बेटी मनीषा (16) थी। उनकी पत्नी और बड़ा बेटा गाजीपुर स्थित गांव गए हैं। नितीश बाहर वाले कमरे में सो रहा था।
कुछ देर बाद जब वह उठा तो दूसरे कमरे में गया। वहां मनीषा कपड़े से बंधी पंखे से लटकी हुई थी। उसने तुरंत पिता को फोन कर घटना की जानकारी दी।
बुधवार से थी परेशान
पिता नंदलाल ने बताया कि बुधवार को मनीषा का नौंवी कक्षा का परिणाम घोषित हुआ था। जिसके बाद से वह परेशान चल रही थी। बुधवार से वह अपने कमरे में ही थी। हालांकि उन्होंने समझाया था कि असफलता-सफलता आती रहती है। उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगले साल के लिए तैयारी करे।
मनोचिकित्सक बोले
मनोचिकित्सक डाॅ. रश्मि जोशी ने बताया कि प्रतियोगिता वादी युग में अभिभावक अक्सर अपने बच्चे को टॉपर देखना चाहते हैं। इस दौरान वे उसकी रुचि और उसकी क्षमता को नजरअंदाज कर देते हैं। असफल होने पर बच्चे असफलता का बोझ नहीं उठा पाते और सुसाइड जैसे कदम उठाते हैं। समय-समय पर उससे बातचीत करते रहना चाहिए। असफल होने पर उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
स्टूडेंट्स द्वारा सुसाइड के कुछ पुराने मामले
28 अक्टूबर 2014: खोड़ा में माता-पिता के डांटने पर आठवीं के छात्र ने की आत्महत्या
11 मार्च 2013ः न्यायखंड-3 में 10वीं कक्षा की छात्रा खुशबू मिश्रा ने परीक्षा के तनाव के चलते फांसी लगाकर सुसाइड किया।
06 जनवरी 2013ः वसुंधरा सेक्टर-3 में एमए स्टूडेंट दीक्षा सिंह ने परीक्षा में विफल होने पर जान दी।
24 जून 2012ः अर्थला की संजय कॉलोनी में रहने वाले जीवन सिंह के बेटे मयंक ने इंजीनियरिंग में दाखिला न होने पर सुसाइड किया।