नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी ठहराए गए विकास यादव को 25 वर्ष सलाखों को पीछे रहना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उसकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एसए बोबडे की पीठ ने विकास यादव की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा कि पूर्व आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं बनता। मालूम हो गत वर्ष तीन अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव को दी गई 25 वर्ष की सजा पर अपनी मुहर लगा दी थी। हालांकि विकास केपास सुधारात्मक याचिका दायर करने का एक और कानूनी विकल्प बचा है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन अक्टूबर, 2016 को अपने फैसले में ‘ऑनर किलिंग’ को मध्यकालीन युग का सनकी कृत्य बताते हुए विकास द्वारा फिक्सड टर्म (हत्या में 25 वर्ष और सबूत नष्ट करने में पांच वर्ष कैद) की सजा को चुनौती देने याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव करते हुए कहा था कि दोनों ही सजा एक-साथ चलेंगी न कि एक के बाद एक।
शीर्ष अदालत ने साथ ही साफ कर किया था कि 25 वर्ष से पहले विकास को किसी तरह की माफी या छूट(रिमिशन) नहीं दी जाएगी। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने विकास को दोषी ठहराते हुए कहा था कि विकास को हत्या के मामले में 25 वर्ष (बिना रिमिशन के) और सबूत नष्ट करने के दोष में पांच वर्ष (बिना रिमिशन के) की सजा सुनाई थी।