अरबों के बाइक बोट फर्जीवाड़े में जेल भेजे गए आदेश भाटी ने निवेशकों की किस्त बंद होने और संजय भाटी के फरार होने के बाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आदेश भाटी ने संजय भाटी व अन्य आरोपियों के इशारे पर निवेशकों को पोस्टडेटेड चेक दिए थे। बड़ी संख्या में निवेशक व चेक होने के कारण इस काम के लिए उसने अपने गांव के कुछ लड़कों को भी लगाया था।
इसके बाद करनपाल नाम से चेक पर हस्ताक्षर कराकर चेक पोस्ट के जरिये भी निवेशकों को भेजे गए थे। करोड़ों रुपये के चेक हस्ताक्षर गलत होने व खाते में रकम न होने के कारण बाउंस हो गए थे।
निवेशक दीपक चौधरी ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर 2018 में बाइक बोट कंपनी ने निवेशकों के खाते में किस्त देनी बंद कर दी थी। इसके बाद निवेशकों में अफरातफरी मच गई थी और वह रुपया डूबने के डर से कंपनी के पदाधिकारियों पर रुपया लौटाने या फिर किस्त चालू करने का दबाव बनाने लगे थे।
इस दौरान संजय भाटी फरार हो गया था। वह केवल सोशल मीडिया व वॉइस रिकार्डिंग के माध्यम से ही निवेशकों को ढांढस बंधा रहा था। इस दौरान कोट गांव स्थित बाइक बोट के मुख्यालय की कमान आदेश भाटी ने संभाल ली थी। वह यहां आने वाले निवेशकों को पोस्ट डेटेड चेक देकर उनका रुपया सुरक्षित होने का दावा करता था।
निवेशकों की किस्त बंद होने के बाद प्रतिदिन बड़ी तादाद में निवेशकों कोट गांव स्थित दफ्तर पर पहुंचते थे। वह अगर हंगामा करते या फिर दबाव बनाते थे। तो उनसे निपटने के लिए आदेश भाटी अपने साथ बाउंसर रखता था। निवेशक लगातार इसकी शिकायत भी करते थे।
सीबीआई जांच के लिए तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
दादरी। कोट गांव स्थित बाइक बोट दफ्तर परिसर में कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे 21 निवेशकों से बात करने रविवार को दादरी तहसीलदार एपी सिंह पहुंचे। निवेशकों ने उन्हें मुख्यमंत्री संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें निवेशकों ने फर्जीवाड़े की जांच सीबाआई से कराने और अन्य फरार आरोपियों करनपाल, बीएन तिवारी आदि की गिरफ्तारी की मांग की। वहीं पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि मामले में जल्द ही और भी गिरफ्तारी हो सकती है।