दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में बुधवार सुबह नीरज बवाना-नवीन बाली और नीतू दबोदा गिरोह में गैंगवार होने से बच गया।
काले कोट और हाथ में फाइल लिए जो शख्स अदालत में दाखिल होने जा रहा था वह कोई वकील नहीं बल्कि एक नामी बदमाश था।
पुलिस की स्पेशल सेल ने पेशी पर आए नीतू दबोदा गैंग के सदस्य प्रदीप उर्फ भोला को मारने के इरादे से आए दस बदमाशों को कोर्ट में गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से छह स्वचालित हथियार बरामद किए गए। गैंगवार की साजिश फरीदाबाद की नीमका जेल में रची गई थी।
जेल में रची थी गैंगवार की साजिश
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (स्पेशल सेल) एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि नवीन बाली का भाई राहुल उर्फ काला बवाना इलाके में दोहरे हत्याकांड में गिरफ्तार किया था। वह रोहिणी जेल में बंद है। इसी जेल में गांव कैर निवासी प्रदीप उर्फ भोला बंद है। वह नीतू दाबोदा (हाल ही मुठभेड़ में मारा गया) और पारस गोल्डी गैंग का सदस्य है।
प्रदीप ने इन लोगों के साथ मिलकर 2012 में नीरज बवाना गिरोह के सदस्य व सोनीपत निवासी अजय उर्फसोनू दादा की हत्या कर दी थी। एक ही जेल में बंद होने से राहुल व प्रदीप में दुश्मनी बढ़ती जा रही थी।
उधर, फरीदाबाद की नीमका जेल में बंद नवीन बाली को लगा कि विरोधी गैंग उसके भाई राहुल की हत्या कर देगा। ऐसे में उसने रोहिणी कोर्ट में प्रदीप की हत्या की साजिश रची।
थोड़ी सी चूक से हो सकता था बवाल
स्पेशल सेल को सूचना मिली कि नवीन अपने साथी विनोद उर्फ जेहरी उर्फ काला और राजकुमार के साथ प्रदीप की हत्या की साजिश रच रहा है और इसके हथियारों का प्रबंध किया जा रहा है। बुधवार को प्रदीप की रोहिणी कोर्ट में पेशी थी।
स्पेशल सेल की टीम ने करीब साढ़े दस बजे कोर्ट में घेराबंदी कर सुल्तानपुर डबास निवासी विकास डबास, विक्की, रविंद्र, दिनेश और मंजीत उर्फ अमेरिका, नरेला निवासी विनोद उर्फ जेहरी, बवाना निवासी राजकुमार, मुंढेरा कलां निवासी सुरेंद्र उर्फ अत्ती, सोनीपत निवासी रविंद्र और घेवरा निवासी सुनील राणा उर्फ विक्की को धर दबोचा। ये लोग मारुति 800, स्विफ्ट और टाटा सफारी में आए थे।
योजना के मुताबिक बदमाशों को वकील का काला कोट और हाथ में केस फाइलें लेकर कोर्ट के अंदर प्रवेश करना था। विकास डबास को उस समय पकड़ा गया, जब वह कोट पहनकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था। इसने अपने पास दो पिस्टल छिपाकर रखी थीं।