जिलेभर में फैली अनधिकृत कॉलोनियों में फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने के आरोप में जिला उपायुक्त समीरपाल सरो ने चार रजिस्ट्री क्लर्कों को निलंबित कर दिया है जबकि चार तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से सिफारिश की है।
साथ ही विभागीय जांच कराने की भी गुजारिश की है। डीसी के मुताबिक अवैध कॉलोनियों में फर्जी रजिस्ट्री कराने का धंधा वर्षों से चल रहा था। इस पूरे रैकेट में क्लर्कों के साथ तहसीलदारों की भूमिका भी संदिग्ध रही है।
जिला उपायुक्त को जिले की तहसीलों में सुविधा शुल्क लेकर अनधिकृत कॉलोनियों में रजिस्ट्रियां किए जाने की सूचना मिली थी। उन्होंने अपने स्तर पर इन मामलों की जांच करवाई। जांच में फरीदाबाद, बल्लभगढ़, तिगांव और मोहना तहसीलों में कुछ अनियमितताएं पाई गईं।
जिला उपायुक्त ने बताया कि ये खेल तहसीलों में काफी समय से चल रहा था और तहसीलदारों को भी इसकी पूरी जानकारी थी लेकिन किसी ने रोकने की कोशिश नहीं की। जांच में दोषी पाए जाने पर चार रजिस्ट्री क्लर्कों फरीदाबाद के खेमचंद चुग, बल्लभगढ़ के प्रकाशचंद्र, तिगांव के कमल और मोहना के ज्ञानेंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इन क्लर्कों को आरोप पत्र भी दे दिए गए हैं। डीसी ने बताया कि इसके अलावा इन्हीं तहसीलों के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के निलंबन के खिलाफ आरोप पत्र दिए जाने की राज्य सरकार को अनुशंसा की है ताकि इन्हें भी निलंबित किया जा सके।
बता दें कि मंगलवार को सेक्टर-12 लघु सचिवालय में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी कमेटी की बैठक में ये मुद्दा केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने उठाया था और जिला उपायुक्त को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिये थे।
और भी रजिस्ट्रियों की हो सकती है जांच
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री करने का मामला सामने आया है इसे देखते हुए पिछले ढाई साल में की गई अन्य रजिस्ट्रियों की भी जांच हो सकती है। क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी कोई पारदर्शिता नहीं आई।
रजिस्ट्री क्लर्क, नायब तहसीलदार और तहसीलदार मिलकर फर्जी तरीके से रजिस्ट्रियां करने का खेल करते रहे। उधर, प्रशासन के इस कदम से रजिस्ट्री करने वाले क्लर्कों में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारों का कहना है कि फर्जी रजिस्ट्रियां करने के लिए क्लर्कों ने रेट भी फिक्स कर रखा था। 25 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक लेकर रजिस्ट्रियां की जाती थीं।