मेट्रो में केबल चोरी में सक्रिय दो बदमाशों को स्पेशल स्टाफ ने गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से पुलिस ने पांच लाख कीमत के केबल और इसे काटने के औजार, वारदात में इस्तेमाल टेंपो और एक कार बरामद की है। पुलिस ने बदमाशों की गिरफ्तारी से पंद्रह मामले सुलझाने का दावा किया है।
मेट्रो पुलिस उपायुक्त जितेंद्र मणि ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों की पहचान राजपुर खुर्द, छत्तरपुर निवासी हैंड्रू परेरा और समालखा निवासी जितेंद्र कुमार के रूप में हुई है। मेट्रो में केबल चोरी की बढ़ती घटना को देखते हुए निरीक्षक अजय कुमार के नेतृत्व में स्पेशल स्टाफ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस ने जिन जगहों पर वारदात हुए थे वहां के आस पास के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की।
साथ ही मुखबिरों को भी सक्रिय किया। 15 दिसंबर की रात पुलिस को सूचना मिली कि मेट्रो में सक्रिय केबल चोरों का एक गैंग रिज रोड, जंगल क्षेत्र एयरपोर्ट मेट्रो टनल के पास से मेट्रो केबल चोरी करने आएगा। सूचना पर पुलिस टीम उस जगह पर पहुंची। जहां पुलिस ने दो लोगों को केबल को एक टेंपो पर लादते हुए देखा। पास ही एक वेगनआर कार खड़ी थी। पुलिस ने दोनों बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने मेट्रो ट्रैक धौला कुआं से शिवाजी स्टेडियम एयरपोर्ट मेट्रो टनल तक मेट्रो के केबल चुराए थे। चोरी की मेट्रो केबल को वह झाड़ियों के नीचे छिपा कर रख दिया था। 15 दिसंबर की रात वह उस मेट्रो केबल को लेने आए थे। उन्होंने बताया कि बाद में वह केबल को कबाड़ी को बेच देते थे और उससे मिले पैसे को आपस में बांट लेते थे।
जांच में पता चला कि आरोपी पिछले एक साल से विभिन्न मेट्रो ट्रैक से केबल की चोरी कर चुके हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार बदमाश गरीब परिवार से हैं। जुआ और नशे की लत को पूरा करने के लिए चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गैंग में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और केबल बरामदगी का प्रयास की जा रही है।
नाले और जंगल के पास देते थे वारदात को अंजाम
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उसके गैंग में छह से सात सदस्य हैं। गैंग के सदस्य नाले या फिर जंगली इलाके में स्थित मेट्रो ट्रैक पर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। गैंग का एक सदस्य रस्सी की मदद से मेट्रो ट्रैक पर चढ़ जाता था। बिजली के झटके से बचने के लिए लकड़ी के डंडा से बंधे आरी (आयरन ब्लेड) की मदद लेता था। केबल काटने के बाद वह केबल को जमीन पर फेंक देता था। नीचे खडे गैंग के अन्य सदस्य तुरंत केबल उठाकर झाड़ियों में छिपा देते थे या फिर केबल को अपने वाहनों में डाल लेते थे। मेट्रो ट्रैक पर खड़ा व्यक्ति रस्सी के सहारे नीचे उतर कर फरार हो जाता था।