परिवार में पिता सुनील कुमार और मां निशा है। पिता एमसीडी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। तुषार सादत नगर स्थित जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा का छात्र था।
बृहस्पतिवार सुबह तुषार स्कूल गया था। इस बीच 10.30 बजे छात्रों ने उसे स्कूल के बाथरूम में अचेत देखा। मामले की सूचना शिक्षकों व प्रिंसिपल को दी गई। शिक्षक तुषार को जीटीबी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जीटीबी अस्पताल से शिक्षकों ने परिजनों को तुषार की तबीयत खराब होने की सूचना दी। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। स्कूल प्रशासन ने बताया कि तुषार को दस्त हो रहे थे, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।
इधर, तुषार की क्लास में पढ़ने वाले छात्रों ने परिवार को बताया कि उसका कुछ लड़कों से झगड़ा हो गया था। इन लड़कों ने उसकी बुरी तरह पिटाई की, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।
स्कूल प्रशासन किसी भी झगड़े और उससे हुई मौत की बात से इनकार कर रहा है। खजूरी खास थाना पुलिस स्कूल प्रशासन व तुषार की क्लास में पढ़ने वाले छात्रों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
"तुषार के शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं। शव कब्जे में लेकर मोर्चरी भेज दिया गया है। शुक्रवार को मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया जाएगा। उसके बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा।" -डॉ. अजीत कुमार सिंगला, जिला पुलिस उपायुक्त
‘स्कूल प्रशासन घटना पर डाल रहा पर्दा’
तुषार के चचेरे भाई रवि ने आरोप लगाया है कि उसके भाई की स्कूल में ही हत्या कर दी गई, लेकिन स्कूल प्रशासन उस पर पर्दा डाल रहा है। रवि का कहना है कि उसने अपने भाई का शरीर देखा है।
सीने और गर्दन पर गुम चोटों के निशान हैं। स्कूल प्रशासन ने जानबूझकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। रवि का आरोप है कि यदि स्कूल की मंशा सही होती, वह समय पर परिवार को सूचना देता। तुषार की मौत 10.30 बजे हो चुकी थी, लेकिन स्कूल ने जीटीबी अस्पताल से 12 बजे उसके बीमार होने की सूचना दी।
परिजनों ने करावल नगर चौक पर लगाया जाम
तुषार के लिए इंसाफ की मांग करते हुए बृहस्पतिवार शाम को परिजनों, रिश्तेदारों व अन्य लोगों ने करावल नगर चौक पर जाम लगा दिया। सूचना मिलते ही काफी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया।
परिजन आरोपियों को पकड़ने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। परिजनों का आरोप था कि तुषार की मौत के लिए कहीं न कहीं स्कूल प्रशासन भी जिम्मेदार है। स्कूल में जाने के बाद बच्चे की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की हो जाती है। पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर वहां से हटाया।