नेपाल समेत देश के कई हिस्सों से दिल्ली के जीबी रोड पर लाई गई लड़कियों से जबरन धंधा कराने के आरोप में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दंपति समेत आठ लोगों को मकोका में गिरफ्तार किया है।
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पुलिस के अनुसार कोठों का संचालन कर अरबपति बने दंपति आफाक व सायरा दिल्ली में करीब 100 करोड़ से अधिक का साम्राज्य खड़ा कर लिया है।
इस बात की भी आशंका है कि आफाक कई बड़े और सफेदपोश लोगों को लड़कियां सप्लाई कर रहा था। पुलिस को इनके पास से चार लग्जरी कारें, नौ लाख कैश, करोड़ों की लेन-देन और प्रॉपर्टी का पता चला है।
नेपाल समेत देश के कई हिस्सों से लड़कियों को जीबी रोड धकेला गया
अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि पुलिस को पता चला कि नेपाल समेत देश के कई हिस्सों से बालिग व नाबालिग लड़कियों को जीबी रोड पर धंधे में धकेला जा रहा है।
जीबी रोड पर लगभग 80 फीसदी धंधे को दो या तीन लोग ही संचालित कर रहे हैं। इस कड़ी में पहली बार अपराध शाखा ने मकोका के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की।
पुलिस को पता चला कि धंधे का संचालन मुरादाबाद संभल निवासी आफाक हुसैन उर्फ आफाक उर्फ बाउजी (45) व उसकी पत्नी सायरा बेगम (40) अपने गुर्गों के जरिये कर रहे हैं।
आरोपियों के जीबी रोड पर 6 कोठे और 40 कमरे
जीबी रोड से पकड़े गए आफाक और उसकी पत्नी
- फोटो : एनडीटीवी
पुलिस ने 25 अगस्त को दिल्ली के अलग-अलग स्थानों से आफाक, उसकी पत्नी सायरा बेगम, दो नेपाली रमेश पांडेय और वासुदेव पांडेय को गिरफ्तार किया।
आफाक व सायरा ने खुलासा किया कि जीबी रोड पर इनके छह कोठे हैं, जिसमें 40 कमरे हैं। इसमें करीब 250 लड़कियों से ये 10 लाख से अधिक रुपये कमाते हैं।
इन लोगों ने इस काली कमाई से दिल्ली में अरबों रुपये की प्रॉपर्टी भी बनाई है। पुलिस के अनुसार पिछले दो दशकों में गैंग नेपाल समेत देश भर से करीब पांच हजार लड़कियों को धंधे में धकेल चुका है।
चारों से पूछताछ के बाद इनके बाकी चार सहयोगियों शमशाद, पूजा, शिल्पा उर्फ तुलसी और मुमताज को भी दबोच लिया गया। पुलिस को मामले में सरफराज उर्फ बिल्ली समेत कई अन्य आरोपियों की तलाश है।
मैनेजर रखते थे हिसाब और एयरपोर्ट की पार्किंग में लेते थे रुपये
आरोपियों से बरामद की गई महंगी कारें
- फोटो : अमर उजाला
मैनेजर रखते थे हिसाब किताब
आफाक और सायरा असल में करीब छह कोठों के मालिक हैं, लेकिन कागज पर कोठों को इन लोगों ने अपने खास गुर्गों के नाम किया हुआ है। कुछ खास लोग काम के बहाने, शादी का झांसा देकर या किसी अन्य बहाने मानव तस्करी कर लड़कियों को कोठे पर ले आते थे।
बदले में उन्हें एक या दो लाख रुपये मिलते थे। कोठे पर सैलरी पर रखे गए मैनेजर सारा हिसाब-किताब रखते थे। कोठे पर तैनात की गई नायिकाएं लड़कियों से जबरन धंधा करवाती थीं।
कोठों पर किसी भी तरह की गड़बड़िय़ों से निपटने के लिए सरफराज उर्फ बिल्ली मसल पावर उपलब्ध करवाता था। सबको उनके काम के बदले उनका हिस्सा दे दिया जाता था।
एयरपोर्ट की पार्किंग में लेते थे रुपये
आफाक के पास से मिली डायरी से पता चला है कि वह रोजाना दस लाख रुपये काली कमाई से कमाता था। सायरा या उसका पति कभी जीबी रोड नहीं जाते थे। अपने गुर्गों से पैसे लेने के लिए उन्हें एयरपोर्ट की पार्किंग में बुलाया जाता था।
आफाक और सायरा देह व्यापार के धंधे के लिए नेपाली लड़कियों को प्राथमिकता देते थे। पुलिस के अनुसार दंपति पिछले दो दशकों के दौरान नेपाल के अलावा देश भर से करीब पांच हजार लड़कियों का सौदा कर चुके हैं।
नेपाल से रमेश पांडेय और वासुदेव पांडेय काम दिलवाने की बात कर लड़कियों को दिल्ली लाते थे। यहां लाकर उन्हें एक से दो लाख रुपये में बेच दिया जाता था। नेपाली लड़कियों के मामले में पकड़े जाने की संभावना कम ही रहती थी। ऐसे में दंपति नेपाली लड़कियों को प्राथमिकता देता था।