महिला एवं बाल विकास परियोजना विभाग की महिला अधिकारी से तीन लाख रुपये की मांग और अभद्रता करने के आरोपी आरटीआई कार्यकर्ता आरके भारद्वाज की अग्रिम जमानत की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।
गिरफ्तारी से बचने के लिए भूमिगत हुए आरटीआई कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट में जस्टिस अनीता चौधरी की अदालत में याचिका दायर की थी।
मालूम हो कि महिला एवं बाल विकास परियोजना विभाग में तैनात एक महिला अधिकारी ने आरके भारद्वाज के खिलाफ 19 अगस्त को महिला थाने में केस दर्ज कराया था।
महिला अधिकारी के मुताबिक नेहरू ग्राउंड में राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के नाम से एनजीओ चलाने वाले आरके भारद्वाज ने आरटीआई लगाकर उनके बारे में निजी जानकारियां मांगी थीं, इनमें उनका निजी पता और छुटिटयों के बारे में भी पूछा गया था।
आरटीआई के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के बावजूद उनके प्रश्रों के उत्तर दे दिए गए थे। महिला अधिकारी का आरोप है कि बावजूद इसके आरके भारद्वाज एक दिन उनके घर पर आया और धमकी दी कि यदि सुकून की जिंदगी चाहती हो तो तीन लाख रुपये दें।
उन्होंने विरोध किया तो अभद्रता की। आरोपी ने विभाग की एक कार्यक्रम अधिकारी जैसा हाल करने की धमकी भी दी। केस दर्ज होने के बाद आरके भारद्वाज ने खुद को बेकुसूर बताते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कुलदीप सिंह के यहां जमानत याचिका लगाई थी लेकिन पीड़िता कई अन्य महिलाओं के साथ कोर्ट में पेश हो गई थीं जिस पर जज ने जमानत नहीं दी।
शुक्रवार को हाईकोर्ट में भी उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। मामले की जांच कर रही महिला थाने की एएसआई मायारानी ने कहा कि एक माह से फरार चल रहे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एसीपी पूजा डाबला से क्राइम ब्रांच की मदद लेने की गुजारिश की है।