अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला की शिकायत पर सीता राम शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 328 और 376 के तहत एक जनवरी 2015 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। चूंकि अभियोजन पक्ष की गवाही विश्वसनीय नहीं है, इसलिए अदालत आरोपी को बरी करती है।
वहीं बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि महिला ने पैसे ऐंठने के लिए उनके मुव्वकिल पर झूठा आरोप लगाया है। महिला अपनी मर्जी से ही लिव-इन में रह रही थी और फिर कॉफी में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म का आरोप लगा दिया।