केजरीवाल को पार्टी लाइन से अलग आवाज रखने वाले लोग पसंद नहीं हैं। और पार्टी की लाइन भी सिर्फ केजरीवाल की लाइन होती है। यही वजह रही कि बेहद अहम पंजाब चुनाव से उन्हें दूर रखा गया है। जबकि पार्टी का बहुत कुछ उस मौके पर दांव पर लगा था।
लेकिन विधायक अमानतुल्लाह के प्रकरण ने सारी हदें पार कर दीं। इस मसले में विश्वास का भी मानना रहा है कि पार्टी के वरिष्ठों के इशारे पर अमानतुल्लाह ने उन्हें भाजपा का एजेंट बताया था। प्रमाण के तौर पर अमानत पर पार्टी की मेहरबानी का वह जिक्र भी करते हैं।
कुमार विश्वास ने बुधवार को इशारे-इशारे में कहा कि वह शहीद हो गये हैं। उन्होंने शव के साथ छेड़छाड़ न करने की नसीहत भी दी। वहीं, कुछ लोगों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि बतौर नेता यह उनकी आखिरी मुलाकात है।
मतलब साफ है कि विश्वास राजनीति से हटने का फैसला कर सकते हैं। विश्वास के इस फैसले का सीधा असर आप की राजस्थान विधान सभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ेगा। जहां बीते कुछ महीने पर पाटी की छात्र इकाई ने बेहतर प्रदर्शन किया था। वहीं, राजस्थान के पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि विधान चुनाव में भी आप अच्छा करेगी।
आम आदमी पार्टी ने ऐसे लोगों को राज्य सभा का टिकट दिया है, जिनकी न तो समाज सेवा के क्षेत्र में पहचान है और न ही राज्य सभा जाने की कोई दूसरी योग्यता ही है। यह फैसला कार्यकर्ताओं की मर्जी के खिलाफ जाकर किया गया। क्या इसे पार्टी के खत्म होने का आखिरी दस्तावेज माना जाये।