कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को दो आरोपियों की कस्टडी पेरोल याचिका खारिज कर दी।
कृष्णा नगर इलाके में डकैती के आरोपियों ने लखनऊ में बहन की विदाई के लिए कस्टडी पेरोल मांगी थी। अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट के मद्देनजर यह निर्णय लिया।
आरोपी सलीम और सोहराब की बहन की शादी 21 अप्रैल 2013 को लखनऊ के मेहंदीगंज में हुई थी। 18 अगस्त को बहन की विदाई में भाग लेने के लिए दोनों ने पेरोल मांगी थी।
याचिका का विरोध करते हुए लोक अभियोजक ने कहा कि आरोपी खतरनाक अपराधी हैं और अगर उन्हें कस्टडी पेरोल दी जाती है तो लखनऊ में शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविंद्र डुडेजा ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इससे पहले भी आरोपी सलीम को उसकी बहन की शादी और रिसेप्शन के लिए पांच से सात मई 2014 के लिए पेरोल दी गई थी। उस समय कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर दिल्ली सशस्त्र पुलिस ने पेरोल रद्द करवाई थी।
दिल्ली सशस्त्र पुलिस ने आवेदन दायर कर लिखा था कि सलीम का खतरनाक अपराधियों से गठजोड़ है। लखनऊ कोर्ट में पेशी के दौरान सलीम के कारण स्थिति बिगड़ गई थी और शिया सुन्नी समुदायों के बीच दंगों की आशंका पैदा हो गई थी।
पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि दंगों की आशंका के मद्देनजर लखनऊ के जिला जज ने अक्तूबर 2013 में सलीम और उसके भाइयों को कोर्ट न लाकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश करने का निर्देश दिया था।
बता दें कि लखनऊ निवासी सलीम, उसका भाई सोहराब और रुस्तम कृष्णा नगर इलाके में ज्वेलर गौरव गंभीर की हत्या व डकैती के मामले में आरोपी हैं। गिरोह ने वर्ष 2011 में वारदात को अंजाम दिया गया था। स्पेशल सेल ने इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।