डकैत से सांसद बनी फूलन देवी की हत्या करने वाले शेर सिंह राणा को दिल्ली की पठियाला हाउस कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 25 जुलाई 2001 को फूलन देवी की हत्या के बाद शेर सिंह राणा ने एक से बढ़कर एक ऐसे कारनामे किए हैं जिनसे न सिर्फ पुलिस हैरान रह गई बल्कि सुरक्षा एजेंसियां भी भौचक्की रह गईं।
फूलन की हत्या के 2 दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जुर्म कबूलने वाले राणा ही इस करामात ने सबको सकते में डाल दिया था। उसने सबके सामने यह कबूल किया था कि उसी ने फूलन की हत्या की है।
इसके बाद जो हुआ वह और भी चौंकाने वाला है। तिहाड़ जेल में करीब ढ़ाई साल तक रहने के दौरान राणा ने कहा था कि तिहाड़ की सलाखें उसे ज्यादा दिनों तक रोक नहीं पाएंगी और हुआ भी ऐसा।
शेर सिंह राणा ने देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल की सुरक्षा की ऐसी धज्जियां उडाईं कि जेल प्रशासन से लेकर सरकार तक हिल गई। पढ़िए शेर सिंह राणा के चौंकाने वाले कारनामे।
10 मिनट में तिहाड़ से फरार हो गया राणा
तिहाड़ से फरार होने में राणा ने ऐसा कारनामा किया जिसे जानकार कोई भी दंग रह जाए। 17 फरवरी 2004 को सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर तिहाड़ की जेल नंबर एक के सामने एक ऑटो रुकी। उसमें से पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति उतरा और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में जेल के अंदर प्रवेश किया।
अंदर जाकर उसने राणा को हरिद्वार कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने की इजाजत मांगी। जेल में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बिना किसी जांच पड़ताल के उसे राणा को ले जाने की इजाजत दे दी और 7 बजकर 05 मिनट में शेर सिंह राणा तिहाड़ जेल से फरार हो चुका था।
तिहाड़ प्रशासन को इसकी भनक पूरे 40 मिनट बाद लगी और तब तक राणा पुलिस की पकड़ से कोसों दूर जा चुका था। राणा के फरार होने की सूचना मिलते ही तिहाड़ समेत पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
राणा के फरार होने पर जेल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए तिहाड़ के असिस्टेंट सुरपरिंटेंडेंट और गार्ड को सस्पेंड कर दिया गया था। सुरक्षा एजेंसियों की को भी राणा के फरार होने से बड़ा झटका लगा और उन्होंने उसकी गिरफ्तारी के लिए छापामारी शुरू की। लेकिन जब वह नहीं मिला तो उस पर 50 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया गया।
पृथ्वीराज की अस्थियां लाने गया अफगानिस्तान!
फूलन देवी की हत्या के दोषी करार दिए गए शेर सिंह राणा ने यह भी दावा किया था कि वह अफगानिस्तान में पृथ्वीराज चौहान की असली समाधि पर गया गया। वहां से वह पृथ्वीराज चौहान की समाधि से मिट्टी लेकर वापस लौटा था।
राणा के मुताबिक उसने इस पूरी यात्रा की सीडी भी तैयार कराई थी। राणा का कहना था कि वह पृथ्वीराज की अस्थियां वापस लाकर भारत का सम्मान लौटाना चाहता है।
इसके बाद राणा ने एक किताब लिखी जिसका नाम है 'तिहाड़ से कंधार तक'। राणा को 2006 में कोलाकाता से गिरफ्तार किया गया था तब से वह तिहाड़ में ही बंद है।
हिंदी अखबार की वजह से पकड़ा गया राणा
तिहाड़ से फरार होने के बाद शेर सिंह राणा सीधे कोलकाता गया। कोलकाता में उसने खुद को एक पुलिस वाला बताया। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए वह अपने परिवार वालों को सेटेलाइट फोन से कॉल करता था।
यहां तक कि परिवार वालों को भी उसके ठिकाने का पता नहीं था। परिजनों से मिलने के लिए वह अपने ठिकाने से तीन सौ किलामीटर दूर कोई जगह तय करता था।
इस दौरान उसने संजय गुप्ता के नाम से पासपोर्ट के लिए भी अप्लाई कर रखा था। कोलकाता प्रवास के दौरान उसने गया और बनारस की भी यात्रा की, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
हालांकि एक दिन जांच एजेंसियों का पता चला कि कोई कोलकाता में हिंदी अखबार ले रहा है। बस यही कड़ी उसके लिए मुसीबत बन गई और हिंदी अखबार की वजह से राणा पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
अपनी जगह में नौकर को भेज दिया जेल
पुलिस जांच के मुताबिक फूलन देवी की हत्या एक सोची समझी साजिश के तहत की गई थी। हत्या वाले दिन ही उसने अपनी बेल कराई थी। दरअसल, वह एक मामूली अपराध में जेल में बंद था और उसके पिता ने जमानत की राशि चुका कर उसकी जमानत कराई थी।
हत्या के बाद उसने पिता से जमानत राशि वापस लेने को कहा जिससे कि वह फिर से जेल चला जाए और रिकॉर्ड में यह साबित किया जा सके कि वारदात के समय वह जेल में था।
साजिश के तहत राणा के पिता ने जमानत राशि वापस लेकर घर के एक नौकर को उसके नाम से जेल भिजवा दिया था। इस मामले में भी राणा को आरोपी बनाया गया था।