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जब उड़ती पतंग देखकर खौल जाता था गोरों का खून

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वह समय कुछ और ही था। हम सब साल भर इंतजार करते थे 15 अगस्त का। दो महीने पहले से ही पतंगबाजी शुरू हो जाती थी। पुरानी दिल्ली की हर छत पर पतंगबाज दिखते थे। लेकिन आजकल, पंद्रह दिन पहले तक कोई हलचल नहीं दिखती।
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बड़े, रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त रहते हैं तो बच्चे, किताबों व टीवी में । आलम यह है कि 15 अगस्त से पहले तीन दिनों में आकाश में पतंगे दिखती हैं।

इतना कहते-कहते 1947 के जश्न पर पतंग उड़ा चुके जयप्रकाश गुप्ता की आवाज नम हो चुकी थी। पतंगबाजी के शौक ने उन्हें पतंगों का सौदागर बना दिया।

अंग्रेजों के खिलाफ नारे लिखकर गिराते थे लाल किले में

फिलहाल लाल कुआं में जयप्रकाश की दुकान है। 67 सालों में आए बदलाव पर जयप्रकाश को अफसोस है। बड़ी मायूसी से उन्होंने कहा कि अब तो हम भी 15 अगस्त को पतंगबाजी नहीं करते। इसकी जगह दो दिन बाद पार्क में इकट्ठे होकर पड़ोसियों के साथ पतंग उड़ा लेते हैं।

वहीं, हाजी सरफराज ने पतंगबाजी पर पूरी कहानी सुना दी। हाजी बोले, 1947 को बड़ा जश्न मना था। नेहरूजी ने पतंग और कबूतर उड़ाया था। आजादी से पहले पतंगें अंग्रेजों को परेशान करने का जरिया भी बनती थी।

उस वक्त पतंग पर गोरों के खिलाफ नारे या आजादी के तराने लिखकर पुरानी दिल्ली में लाल किला के इर्दगिर्द लोग बड़ी संख्या में पतंग उड़ाते थे। ऊपर जाने पर पतंगों को ऐसे छोड़ा जाता कि वह किले में जाकर गिरती। जिसे पढ़कर अंग्रेज चिढ़ जाते थे।

भाई मियां बिना अधूरी है दिल्ली की पतंगबाजी

दूसरी तरफ पुराने पतंगबाजों पर सचिन गुप्ता का जवाब था कि पुरानी दिल्ली की पतंगबाजी भाई मियां के बगैर अधूरी है। भाई मियां पतंग बनाने और उड़ाने के उस्ताद माने जाते हैं।

87 साल के भाई मियां कई देशों के काइट फेस्टिवल में हिस्सा ले चुके हैं। उनके नाम कई रिकॉर्ड और अवार्ड भी शामिल हैं। आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीमा पर पतंगबाजी की छटा बिखेरी थी।

उनकी सबसे छोटी पतंग जहां दो मिलीमीटर की है, वहीं सबसे बड़ी पतंग 400 फीट की है। इतना ही नहीं, उन्होंने मोर, सांप समेत कई चिड़ियों और जानवरों की तरह पतंगे बनाई हैं।

पतंगबाजी में मोदी सब पर भारी

लाल कुआं के बाजार में स्थानीय दुकानदारों के साथ जयपुर, बरेली और मुरादाबाद से कारोबारियों ने भी पतंग और मांझे की दुकान सजाई हैं।

बाजार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण, सलमान खान, जैक्लीन के साथ मिकी माउस व बच्चों के कार्टून की थीम पर पतंगें मौजूद हैं।

कारोबारियों के मुताबिक, फिलहाल मोदी सब पर भारी हैं। पतंग कारोबारी सचिन गुप्ता ने बताया कि सबसे ज्यादा मांग मोदी छाप पतंगों की है। ज्यादातर लोग इसी तरह की पतंगों की फरमाइश कर रहे हैं।
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चीनी पर भारी देशी

बाजार में कपड़े से बनाई गई चीनी पतंगे भी हैं। लेकिन देशी पतंग उन पर भारी है। बिशन चंद एंड संस के बबलू गुप्ता ने बताया कि इसकी बड़ी वजह कीमतों का फर्क है।

देशी पतंगें जहां एक रुपये से पंद्रह रुपये के बीच मिल जाती है, वहीं चीनी पतंग की कीमत पंद्रह रुपये से शुरू होकर पांच रुपये तक जाती है।

पतंग के पुराने कारोबारी बलवीर गुप्ता के मुताबिक, पतंगबाजी के कई फायदे हैं। एक तो इससे आंख खराब नहीं होती। वहीं, पतंगबाज को हार्ट अटैक का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा पतंगबाजी के दौरान उसका पूरा व्यायाम हो जाता है।
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