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कोरोना: टीका वितरण की मोबाइल से होगी निगरानी, पूरे देश में एक जैसी योजना लागू करने के विचार में केंद्र

Mon, 05 Oct 2020 07:45 PM IST
शाहरुख खान परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
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कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर भले ही अगले वर्ष तक का इंतजार करना पड़े लेकिन भारत में उससे पहले वैक्सीन वितरण सहित तमाम बिंदुओं पर राज्यों में तैयारी शुरू हो चुकी है। मोबाइल फोन से वितरण प्रणाली पर निगरानी के लिए एक सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है। 
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राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में एक जैसी योजना लागू करने के लिए केंद्र सरकार विचार कर रही है। ताकि सभी राज्यों को समानता के साथ टीकाकरण पर जोर दिया जा सके। इसके अलावा जिला स्तर पर कोल्ड चैन भंडारण को लेकर भी तैयारियां शुरू की गई हैं। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि वैक्सीन को लेकर एक व्यवस्थित योजना के बारे में राज्यों से जानकारी मांगी गई है। 15 अक्तूबर तक यह जानकारी एकत्रित होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल की अध्यक्षता में वैक्सीन को लेकर टास्क फोर्स बनाया गया है। 
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उन्होंने यह भी बताया कि जिला स्तर पर कोल्ड चैन को लेकर काफी काम करने की आवश्यकता है क्योंकि वैक्सीन को तय तापमान में ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए राज्यों से कम समय में बेहतर तैयारियों के लिए कहा गया है। संबंधित राज्य सरकारें अपने अपने यहां जिला, ब्लॉक और राज्य स्तर पर बैठकें कर रही हैं। 
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सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार आशा वर्कर से लेकर जिला अस्पताल और जिला स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीमों को कोरोना वैक्सीन की जिम्मेदारी देने के विचार में हैं। इसलिए राज्यों से फ्रिज, कोल्ड स्टोर, वैक्सीन सुरक्षा संबंधी उपाय, ब्लॉक स्तर पर आबादी और कर्मचारियों की संख्या इत्यादि ब्यौरा मांगा गया है। 

इतना हीनहीं जिन राज्यों में सुविधाएं नहीं हैं वहां तत्काल कोविड महामारी के लिए आवंटित बजट के तहत इन तैयारियों को शुरू कर दिया जा ताकि अगले दो से तीन महीने में जब वैक्सीन बनकर तैयार हो तो उसका इस्तेमाल आम जनता के लिए किया जा सके। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि वैक्सीन को लेकर राज्यों के पास अधिकार है लेकिन केंद्रीय स्तर पर एक सिस्टम बनाया जा रहा है। यह सिस्टम मोबाइल फोन आधारित होगा जिसमें देश के हर जिले से जुड़ी जानकारी होगी। किस जिले में वैक्सीन की कितनी जरूरत है? कहां कितना भंडारण है इत्यादि जानकारी केंद्रीय स्तर पर रोजाना अपडेट की जाएंगी। 

सबसे बड़ी बात यह है कि मोबाइल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए केंद्र कोरोना वैक्सीन के वितरण और टीकाकरण में पारदर्शिता बरतने के लिए एहतियात बरत रहा है क्योंकि केंद्र को आशंका है कि वैक्सीन बाजार में आने के बाद इसकी कालाबाजारी भी हो सकती है। 
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वैक्सीन आने के बाद भी आसान नहीं

नेशनल टास्क फोर्स से जुड़े एक सदस्य ने वैक्सीन को लेकर कहा है कि अगर यह अगले वर्ष मार्च-अप्रैल 2021 तक आ भी जाती है तो भी देश के हर व्यक्ति तक उपलब्ध नहीं होगी। वैक्सीन विज्ञान में पोस्ट मार्केटिंग अध्ययन का विकल्प होता है जिसे चौथे फेज का परीक्षण भी कहा जाता है। यह वैक्सीन आने के बाद कुछ लोगों को दी जाएगी। उनका नाम, पता, शहर इत्यादि के बारे में सरकार के पास जानकारी होगी और उनमें दुष्प्रभावों को लेकर अध्ययन होगा।

इसी दौरान पुलिस, सुरक्षा जवान, स्वास्थ्य कर्मचारियों और सरकारी कर्मचारियों को वैक्सीन दी जाएगी। इसके बाद बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बच्चों को वैक्सीन उपलब्ध होगा। इसके बाद सामान्य व्यक्तियों के लिए दिया जा सकेगा। उम्मीद यही है कि इस पूरी प्रक्रिया को अगले वर्ष के अंत तक पूरा कर लिया जाए। 
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