दिल्ली पुलिस के एसीपी राजबीर की हत्या के आरोपी
की सीबीआई की विशेष अदालत में पेशी के नाम पर मौज-मस्ती कराने वाले चार
पुलिसकर्मियों सहित छह लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत
मामला दर्ज किया गया है।
इस मामले में तीन पुलिसवाले गिरफ्तार किए जा चुके
हैं, जबकि चौथा फरार है। पुलिस आयुक्त ने उन्हें निलंबित कर जांच एसीपी
क्राइम को सौंपी है।
आरोप है कि इन चारों
पुलिसकर्मियों से मिलीभगत कर मौज-मस्ती की व्यवस्था विजय भारद्वाज और उसका
भाई किया करता था। इस मामले में दोनों आरोपी हैं।
उल्लेखनीय है कि छह साल
पहले दिल्ली के तेजतर्रार एसीपी राजबीर की उनके प्रॉपर्टी डीलर दोस्त विजय
भारद्वाज ने हत्या कर दी थी। वह जिले की भोंडसी जेल में बंद है।
अदालत में पेशी के नाम पर कराते थे मौज मस्ती
पुलिसवाले पंचकूला की सीबीआई अदालत में पेशी के
नाम पर रास्ते में मौज-मस्ती करते थे। बदले में वे दोनों भाइयों की अनुचित
मांगें पूरी करते थे। बताते हैं कि रविवार दोपहर विजय भारद्वाज को चंडीगढ़
ले जाने वाले तीन पुलिसकर्मी सेक्टर 14 में अपराध शाखा की टीम को रात 11
बजे संदिग्ध हालात में मिले।
चंडीगढ़ न जाकर वे लोग विजय के घर सेक्टर-14
पहुंच गए। चौथा पुलिसकर्मी नरेश यह कहकर अंबाला चला गया कि वह उन्हें
चंडीगढ़ में मिलेगा।
अपराध शाखा के प्रभारी
इंस्पेक्टर अमित के बयान पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने विजय भारद्वाज, उसके
भाई, एएसआई धन सिंह, सिपाही रिंकू, पवन, नरेश के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक
अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
एक अन्य टीम ने
हत्यारोपी को सोमवार को सीबीआई कोर्ट में पेश कर भोंडसी जेल भेज दिया। फरार
सिपाही नरेश की तलाश चल रही है। पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल ने बताया कि इन
पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
एक दिन बाद भेजते थे जेल
पुलिस
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी को पंचकूला की सीबीआई अदालत
में पेश करने के लिए एक दिन पहले जेल से निकाला जाता था और एक दिन बाद सुबह
अंदर भेजा जाता था।
आरोपी कोर्ट में पेश होने से पहले और पेशी के बाद अपने
घर पर रहता था। एसीपी क्राइम ने जेल प्रशासन से रिकॉर्ड मांगा है कि वह कब
निकलता था और उसकी वापसी कब होती थी। साथ ही पुलिसकर्मियों की मोबाइल
डिटेल पर काम चल रहा है।