दिल्ली के राजनैतिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जबकि भाजपा ने चुनाव प्रचार में कांग्रेस से फोकस हटा लिया हो। जबकि पिछले विधानसभा में भी आप का अंडर करंट जानने के बावजूद भाजपा का मुख्य निशाना कांग्रेस पर ही रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस को अपने फ्रेम से बाहर कर दिया और आम आदमी पार्टी का नाम लिए बिना उसपर कई हमले बोले। एक तरह से प्रदेश भाजपा के नेताओं को संकेत दिया गया कि विजय श्री प्राप्त करने के लिए आप को अंडर एस्टीमेंट नहीं किया जा सकता। झुग्गी-झोपड़ी व बिजली जैसे मुद्दे आप से छीनने की कोशिश भी मुख्यमंत्री के भाषण में हुई।
जैसा अंदेशा था रैली में वैसे ही देखने को मिला। हरियाणा, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों को मंच पर लाया गया और प्रधानमंत्री मोदी सहित इन नेताओं ने बताया कि किस तरह से आम कार्यकर्ता वंशवाद की राजनीति को खत्म कर मुख्यमंत्री बना है।
दिल्ली में रहने वाले प्रवासी वोटरों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्रियों के अलावा उत्तराखंड के भाजपा नेता व धर्म गुरु सतपाल महाराज को भी मंच पर जगह मिली।
लोगों को लुभाने के लिए हुईं घोषणाएं
अन्य लोगों को लुभाने के लिए मोदी ने कई चुनावी घोषणाएं की, जिनमें झुग्गी झोपड़ी सहित बिजली के मुद्दे आप से छीनने की कोशिश का हिस्सा हैं। हालांकि हरियाणा-दिल्ली का पानी विवाद दोनों के नुकसान न होने पर सुलझाने की बात तो मोदी ने की, पर कैसे यह स्पष्ट नहीं किया।
इस रैली में सबसे बड़ा बदलाव यह दिखा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर हमला करना उचित ही नहीं समझा। मोदी ने पिछली सरकार के काम न करने के आरोप तो लगाए लेकिन आप का नाम न लेते हुए उसपर हमले को सात से आठ मिनट का समय दिया। आप पर दिल्ली को एक साल पीछे करने का भी आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा कि जनता इनका झूठ जानती है।
यह दूसरी बात है कि कुछ देर बाद ही केजरीवाल ने मोदी के दावों व वादों पर सवाल खड़े कर दिए। जाहिर है कि आप भी मैदान में विरोधियों पर पूरी नजर रखकर तुरंत प्रतिक्रिया देकर दिल्ली के दंगल को दिलचस्प बनाएगी। आप सूत्रों के अनुसार मोदी के भाषण का पोस्टमार्टम जनता के बीच करने के लिए आप ने रणनीति तैयार कर ली है। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि आप ही भाजपा की इस चुनाव में मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगी।
धुंधला ही रहा सीएम उम्मीदवार का चेहरा
दिल्ली का विधानसभा चुनाव भाजपा में बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के लड़ा जा रहा है यह बात तो पहले से ही स्पष्ट है, लेकिन जिन नामों पर चर्चा है उन सभी को मंच पर स्थान मिलने से इसका कयास नहीं लगाया जा सका कि दौड़ से कौन बाहर है।
संभावित उम्मीदवारों की दौड़ में शामिल सभी आठ चेहरे मंच पर मौजूद थे। लेकिन अभी इस बात का खुलासा नहीं हो पा रहा है कि आखिरकार वो कौन है जो दिल्ली का नया चेहरा हो सकता है।
दूसरी ओर दिल्ली में मुख्यमंत्री रही सुषमा स्वराज व दिल्ली से जुड़े रहे अन्य भाजपा नेताओं का मंच पर न होना चर्चा का विषय बने रहे।