राजधानी दिल्ली में छाए राजनीतिक संकट पर भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों ने ही अपना रुख साफ नहीं कर रही हैं।
लोकसभा चुनावों में करारी हार मिलने के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली में सरकार बनाने की संभावना के चलते कुछ समय के लिए तो सक्रिय हुई लेकिन अब मामला फिर दबता जा रहा है।
दिल्ली की जनता की मूलभूत समस्याओं को छोड़कर कांग्रेस और आप ने केंद्र की बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इससे बीजेपी तो बैकफुट पर आ गई है लेकिन दिल्ली की जनता की अनदेखी हो रही है।
मूल मुद्दे से भटक गईं कांग्रेस-AAP
दरअसल, लोकसभा चुनाव में दिल्ली में की सीटों पर पत्ता साफ होने के बाद आम आदमी पार्टी ने एक बार तो सरकार बनाने की सोची लेकिन जब कांग्रेस ने समर्थन देने से मना कर दिया तो 'आप' ने भी दोबारा चुनाव कराने की रट लगानी शुरू कर दी।
वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने पहले ही रुख साफ किया था कि अब वे किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए समर्थन नहीं देंगे। कांग्रेस ने भी दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी।
हालांकि अब स्थिति एकदम विपरीत दिख रही है। दिल्ली में सरकार बनाने या फिर चुनाव कराने के मसले को छोड़कर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी महंगाई और रेल किराए में वृद्घि के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने में जुटी हैं। ऐसे में मूल मुद्दा पीछे छूटता जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में है मामला
बता दें कि दिल्ली में पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी और कुल 49 दिनों तक शासन किया था।
इसके बाद पार्टी ने सरकार से इस्तीफा दे दिया और उपराज्यपाल से विधानसभा भंग करने की मांग की, लेकिन उपराज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लगाने की संस्तुति कर दी।
इसके खिलाफ आप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिस पर फिलहाल सुनवाई होनी बाकी है।