लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद अब एक बार फिर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच दिल्ली में सरकार बनाने की खिचड़ी पकने लगी है।
यह बात अलग है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष इस बात से लगातार इंकार करते आए हैं कि वह सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को समर्थन देंगे।
कांग्रेस नेताओं के इस बयान के बावजूद पर्दे के पीछे दिल्ली में दोबारा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के गठजोड़ वाली सरकार बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
सरकार बनाने की राह आसान!
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कांग्रेस के कई विधायकों ने आम आमदी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है। यही नहीं, उन्होंने राजधानी में सरकार बनाने के लिए 'आप' को समर्थन देने का वादा भी किया है।
दिल्ली में बीजेपी के तीन विधायकों के सांसद बनने के बाद अब 70 विधायकों वाली विधानसभा में सदस्यों की संख्या 67 ही बची है। ऐसे में आप और कांग्रेस का ये गठजोड़ बड़े आराम से सरकार बना सकता है।
गौरतलब है कि बीते साल हुए विधानसभा चुनावों में 28 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के 8 विधायकों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी और लगभग 49 दिनों तक शासन करने के बाद केजरीवाल सरकार ने इस्तीफा दे दिया था।
AAP को भी है बड़ी टेंशन
उस समय दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने जनलोकपाल बिल पास कराने में कांग्रेस पर असहयोग का आरोप लगाते हुए सरकार से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही उपराज्यपाल से विधानसभा भंग करने की अपील भी की थी।
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दिल्ली की सातों सीटों पर जबरदस्त वोटों के साथ जीत हासिल की है।
हालांकि आम आदमी पार्टी चुनाव में दूसरे स्थान पर रही है लेकिन पार्टी के ज्यादातर विधायक जनता के बीच 'आप' की गिरती छवि और केजरावाल विरोधी हवा से डरे हुए हैं।
क्यों डर रही है कांग्रेस?
दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने के लिए बीजेपी ज्यादा जोर लगा रही है क्योंकि उसे अपनी जीत पक्की दिख रही है, लेकिन अन्य पार्टियां इससे बचना चाह रही हैं।
यही वजह है कि दिल्ली में अब एक बार फिर आप और कांग्रेस की नजदीकियां बढ़ रही हैं। दोनों पार्टियों के विधायक फिलहाल विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते।
एक्स्रपेस के मुताबिक कांग्रेस को इस बात का डर है कि अगर दोबारा चुनाव हुए तो उन्हें दिल्ली में एक बार फिर मुंह की खानी पड़ सकती है और उनकी 8 सीटें भी छिन सकती हैं।
दिलचस्प होगी ये लड़ाई
वहीं, आम आदमी पार्टी के साथ भी समस्या इस बात की है कि लोकसभा चुनाव में मात्र एक भी सीट न जीतने से कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा पड़ चुका है। साथ ही 7 महीने के भीतर तीसरा चुनाव होने पर पार्टी के पास फंड की कमी होगी।
सरकार बनाने के मसले पर दोनो ही पार्टियों में कुछ नेताओं की राय जुदा है। दरअसल, कांग्रेस और आप दोनों पार्टियों के कुछ नेता दिल्ली में दोबारा मिलकर सरकार बनाने से बचना चाह रहे हैं।
जबकि दोनों पार्टियों का एक धड़ा सरकार बनाने के पक्ष में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आप को समर्थन देती है या फिर उसके विधायक अलग गुट बनाकर पार्टी का सहयोग करते हैं।