डेंगू, चिकनगुनिया जैसे लक्षण वाला वायरल बुखार शहर में तेजी से फैल रहा है। बदनदर्द, शरीर में चकत्ते पड़ना, जोड़ों में दर्द, सूजन और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या कम होने का नाम ही नहीं ले रही है।
रविवार को बीके सिविल अस्पताल में तेज बुखार, शरीर और जोड़ों में दर्द की शिकायत के साथ करीब दो सौ मरीज पहुंचे। बीके अस्पताल की ओपीडी रविवार को छुट्टी होने की वजह से बंद थी।
इमरजेंसी वार्ड में तैनात ईएमओ डॉ. बिशनवती चौहान ने बताया कि सुबह आठ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक 61 मरीज बुखार और बदनदर्द की शिकायत लेकर पहुंचे।
इनमें से आठ को भर्ती किया गया बाकी को खून की जांच करवाने की सलाह के साथ दवा देकर घर भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन दो सौ से अधिक बुखार के मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। यही हाल निजी अस्पतालों का भी है।
आरएमओ डॉ. नवीन गर्ग के मुताबिक डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज कम आ रहे हैं। वर्तमान में जो वायरल बुखार फैला हुआ है, उसके लक्षण डेंगू और चिकनगुनिया से मिलते जुलते हैं।
खून की जांच रिपोर्ट आने तक मरीजों का इलाज लक्षण के आधार पर किया जाता है। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह के बुखार में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें, शरीर अधिक गर्म होने पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें और डॉक्टर की सलाह पर दवाएं लें।
यह बुखार पांच छह दिन में ठीक हो जाता है। बसेलवा कॉलोनी से आईं लक्ष्मी देवी के शरीर और जोड़ों में इतना दर्द था कि वह हाथ पैर भी नहीं हिला पा रही थीं।
सिर्फ 17 में ही मिला डेंगू वायरस
शहर में डेंगू, चिकनगुनिया के लक्षण वाले बुखार के मरीजों की संख्या तीन हजार पार कर चुकी है। बावजूद इसके डेंगू के महज 17 और चिकनगुनिया के 8 मरीज ही मिले हैं। हालांकि निजी और सरकारी अस्पतालों के पांच सौ से अधिक मरीजों के टेस्ट किए जा चुके हैं। डॉ. नवीन गर्ग कहते हैं कि संक्रामक होने की वजह से बुखार परिवार के अन्य सदस्यों को भी चपेट में ले सकता है।
फॉगिंग, एंटी लार्वा एक्टिविटी हो तो सुधरें हालात
मच्छरों पर काबू पाने के लिए फॉगिंग और एंटी लार्वा एक्टिविटी के कार्य 2015 में स्वास्थ्य विभाग से लेकर नगर निगम को सौंप दिए गए थे।