दिल्ली मेट्रो रेल के आने से शहर के लोगों को भले ही सुविधा मिली हो, मगर सुशांत लोक कॉलोनी के लोग इसे अभिशाप मानते हैं।
उनका कहना है कि मेट्रो के आने से जमीनों की दर तो बढ़ी पर बिल्डर व प्रशासन की तरफ से कॉलोनी में कोई सुविधाएं नहीं दी जा रही है।
कहने को तो सुशांत लोक पॉश एरिया है, यहां आपको 500 गज के मकान में रहने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इस हिसाब से इसका पांच प्रतिशत यानी 25 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी पर खर्च करना होगा।
दुखद यह है कि सुशांत लोक कॉलोनी के लोग इतनी रकम खर्च करने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। करीब 29 साल पहले इस इलाके में अंसल ने 700 एकड़ जमीन पर 20 हजार प्लॉट काटे थे। इसमें हजारों परिवार रह रहे हैं।
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कहने को वे शहर के पॉश इलाके सुशांत लोक में रहते हैं, पर सुविधाएं पड़ोसी गांव कन्हैई से भी कम है। यहां के लोगों का कहना है कि उपायुक्त से लेकर प्रमुख सचिव तक गुहार लगा चुके हैं, इसके बावजूद इलाके का ढांचागत विकास नहीं हुआ है।
क्या है कलेक्ट्रेट रेट
77000 रुपए प्रति वर्ग गज रिहायशी व 165000 रुपए प्रति वर्ग गज व्यवसायिक दर है।
सुशांतलोक कॉलोनी से जुड़ी जानकारी
: कन्हैई गांव की 700 एकड़ जमीन पर कालोनी बसी है।
: 20 हजार प्लाट है। जिसमें रहने वालों की संख्या हजारों में है।
: मेंटीनेस के नाम पर बिल्डर को एक रुपए की जगह दो रुपए 90 पैसे दिया जाता है।
: कालोनी के लोगों को पैसे के हिसाब से सुविधा नहीं है।
क्या है कमी
: कॉलोनी बसने के बाद से सड़क रि-कार्पेट नहीं हुई।
: सुरक्षा गार्ड नहीं हैं।
: बारिश में घरों में पानी घुस जाता है।
: पानी निकासी प्रबंधन नहीं।
: ड्रेनेज सिस्टम भी है चौपट।