देश की राजधानी दिल्ली के कोचिंग सेंटर में पानी भरने से हुई तीन छात्रों की मौत के बाद दुर्ग जिला प्रशासन एक्शन मोड़ पर आ गई है। कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने जिले में संचालित सभी कोचिंग सेंटर की बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया है। इसके लिए पांच सदस्यीय दल का गठन किया गया है। कलेक्टर के निर्देश के बाद गठित टीम दुर्ग-भिलाई से अपना काम शुरू कर दिया है।
टीम ने दुर्ग भिलाई के विभिन्न क्षेत्र में संचालित कोचिंग सेंटरों का टीम ने बारीकी से जांच किया। इस दौरान कोचिंग सेंटर संचालित किए जाने वाले भवन के बेसमेंट का उपयोग और वहां पानी भर जाने की स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने का आंकलन टीम ने किया। कई कोचिंग सेंटरों में खामियां पाई गई संचालकों को सुधार करने की हिदायत दी गई।
इसके अलावा विद्युत व्यवस्था, वेंटिलेशन, अग्निशमन की उपलब्धता का भी निरीक्षण किया गया। इस संबंध में एडीएम अरविंद एक्का ने बताया कि सिविक सेंटर स्थित कुछ कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया गया। जिसमें कुछ जगह छात्र छात्राओं के प्रवेश और बाहर जाने के लिए एक ही रास्ता बनाया गया है। किसी घटना दुर्घटना की स्थिति के लिए आपातकालीन रास्ता या दरवाजा नहीं है।
कुछ कोचिंग सेंटर में बच्चों के लिए वॉशरुम काम चलाऊ बनाया गया है। वहीं बिजली कनेक्शन वाले वायरिंग पर भी लापरवाही देखने को मिला है। जिस भवन में कोचिंग सेंटर संचालित है। उसका निर्माण भवन अनुज्ञा की भी जांच की गई। जांच टीम अपर कलेक्टर अरविंद एक्का, नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त देवेश ध्रुव, नगर पालिक निगम रिसाली के आयुक्त मोनिका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर मुकेश रावटे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास हेमंत कुमार सिन्हा, जिला सेनानी नगर सेना नागेन्द्र कुमार सिंह समेत सभी थाना प्रभारी शामिल है।
जांच टीम के द्वारा दुर्ग भिलाई में संचालित कोचिंग सेंटर आईआई टायन गुरू, वेदांतु लर्निंग सेंटर, एनईई एण्ड जेईई, मोशन, कोटा स्टडी सर्कल, सिविक सेंटर भिलाई एवं रिसाली स्थित बायजूस, पारख सुपर मार्केट तथा नेहरू नगर भिलाई स्थिति फिजिक्स वाला कोचिंग सेंटर की जांच की गई।