मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उप-राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि एमसीडी में होने वाले नॉमिनेशन दिल्ली के शहरी विकास मंत्री के जरिए भेजे जाते हैं, लेकिन एमसीडी के आयुक्त ने फाइलें सीधे उप-राज्यपाल को भेज दी है। इस कारण पार्षद मनोनीत करने पर संविधान और सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित कानून व प्रक्रिया के अनुसार पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के दिन-प्रतिदिन के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप और बाधित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।
केंद्र में सत्तासीन पार्टी की मदद करने व स्थायी समिति के चुनावों को प्रभावित करने के लिए पार्षदों को असंवैधानिक रूप से मनोनीत कर जनादेश को नकारने की कोशिश की गई है। डीएमसीडी की धारा 3(3)(बी)(आई) के तहत शक्तियों का कथित प्रयोग कर दिल्ली की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार की मंत्रिपरिषद को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए 10 व्यक्तियों को एमसीडी के सदस्य के रूप में नामित किया गया है।
उन्होंने कहा कि सदस्यों के नामांकन में एमसीडी की स्थायी समिति के चुनाव की प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास प्रतीत होता है। इन 10 सदस्यों को जानबूझकर 12 में से सिर्फ तीन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है, जबकि स्थायी समिति के एक सदस्य को प्रत्येक क्षेत्र से चुना जाता है।