मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी की वर्तमान आबादी के मुताबिक पानी नहीं मिलने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, केंद्र और सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1997-98 में राजधानी के लिए 800-850 एमजीडी पानी तय किया गया था। उस वक्त राजधानी की आबादी 80 लाख थी, जबकि आज राजधानी की आबादी 2.5 करोड़ हो गई है, लेकिन राजधानी का पानी नहीं बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार राजधानी को 1300 एमजीडी पानी दे दे तो दिल्ली सरकार 24 घंटे पानी घर-घर में पहुंचा देगी। लिहाजा केंद्र सरकार आसपास के राज्यों से पानी दिलवाने में मदद करें।
बिधूड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री कभी राजधानी में पेरिस जैसी सड़कें बनाने का वादा करते हैं, कभी लंदन और सिंगापुर की सड़कों के सपने दिखाते हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि राजधानी की सड़कों की हालत जर्जर हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों को राजधानी के प्रदूषण का बड़ा कारण बताया है। पिछले आठ साल में राजधानी की नई सड़कें बनाना तो दूर, मौजूदा सड़कों की मरम्मत का काम भी दिल्ली सरकार नहीं कर पाई। पिछले साल अक्तूबर में बारिश के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दावा किया था कि एक महीने में सारी सड़कों की मरम्मत कर दी जाएगी, लेकिन दिल्ली की जनता सड़कों की बुरी हालत झेल रही है। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री ने अप्रैल से सड़कों की मरम्मत करने का नया झांसा दिया है, जबकि राजधानी में पिछले कुछ सालों से सड़कों के निर्माण का अधिकतर कार्य केंद्र सरकार ही कर रही है। ब्यूरो