टीबी यानी, क्षय रोग से बचाव की दिशा में भारत जल्द ही एक बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। भारतीय वैज्ञानिकों ने टीबी से बचाव के लिए वैक्सीन पर अध्ययन शुरू कर दिया है।
सोमवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दो वैक्सीन पर क्लीनिकल ट्रायल के लिए मरीजों का पंजीकरण शुरू किया। दिल्ली सहित 6 राज्यों के 7 शहरों से लगभग 12 हजार मरीजों को लेकर 3 वर्ष तक दो अलग-अलग समूह में ये ट्रायल किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि अगले छह से सात माह के दौरान मरीजों के पंजीयन का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसी साल के अंत तक भारतीय वैज्ञानिक वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ जाएंगे।
दिल्ली की बात करें तो एम्स, सफदरजंग और वल्लभगढ़ स्थित एम्स सेंटर के अलावा महरौली स्थित क्षयरोग व श्वसन रोग के राष्ट्रीय संस्थान में आने वाले मरीजों को इसमें शामिल किया जाएगा।
आईसीएमआर की वैज्ञानिक डॉ. मंजुला सिंह बताती हैं कि टीबी एक संक्रामक रोग है। दुनिया में सबसे ज्यादा टीबी के रोगी भारत में है। टीबी रोग होने के बाद मरीज के परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसका खतरा रहता है। इससे ना सिर्फ बीमारी का दायरा बढ़ता है, बल्कि इसके चलते गंभीर परिणाम भी देखने को मिलते हैं। इसलिए 2 वैक्सीन पर क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है।
ट्रायल में ज्यादातर वे लोग होंगे, जिनके परिवार में किसी ना किसी को टीबी की बीमारी हुई है, ताकि उनमें संक्रमण की स्थिति का पता लगाया जा सके। एक सवाल के जवाब में डॉ. मंजुला ने बताया कि ट्रायल पूरा होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वीपीएम1002 वैक्सीन का निर्माण किया है, जबकि दूसरी वैक्सीन एमआईपी है। इन दोनों वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है।
दिल्ली के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु और तेलंगाना के मरीजों को इसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दुनिया में टीबी के खिलाफ महाअभियान छिड़ा हुआ है। इसमें भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने 5 वर्ष पहले 2025 तक टीबी मुक्त देश का संकल्प लिया है। अन्य देशों ने ये लक्ष्य 2030 का रखा है।
उन्होंने बताया कि ट्रायल के दौरान वैक्सीन आमजन के लिए कितना सुरक्षित और प्रभावी है, इसके बारे में पता लगाया जाएगा। इसमें एक लंबा वक्त भी लग सकता है, इसलिए अनुमान है कि 3 से 4 वर्ष के दौरान ही वैक्सीन के परिणाम सबके सामने होंगे। तमाम विभागीय मंजूरी लेने के बाद इसके ट्रायल पर काम शुरू हो चुका है।