हाईकोर्ट ने बरसात में जलभराव और उससे लगने वाले जाम की समस्या को हल करने के लिए संबंधित विभागों को ड्रोन का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि ड्रोन के इस्तेमाल से जलभराव वाले स्थानों की पहचान आसानी से की जा सकती है। हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि एक ओर जलभराव है तो दूसरी ओर पानी की भारी कमी है।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस समस्या के हल के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाए तथा एक नियंत्रण कक्ष बनाया जाए, जिससे जलभराव व ट्रैफिक जाम की जानकारी मिलने पर फौरन सुधार का कदम उठाया जा सके।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की जानकारी मिलने पर संबंधित विभाग जलभराव वाले स्थानों पर वर्षा जल संचयन पर भी विचार कर सकता है। इससे एक ओर जलभराव नहीं होगा तो दूसरे भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ेगा। सभी विभाग मिलकर काम करें तो राजधानी के लोगों को इस मानसून में असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस मामले में 24 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने जलभराव की समस्या पर खुद संज्ञान लेते हुए यह सुनवाई शुरू की है। हाईकोर्ट ने इस बात पर गौर किया जलभराव के कारण न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि कई लोग जाम में फंसकर अस्पताल आदि समय पर नहीं पहुंच पाते।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता गौतम नारायण ने रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर इससे निपटने के उपायों पर विचार किया जा रहा है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस साल जलभराव की समस्या नहीं होगी, क्योंकि नालों की सफाई का काम पूरा किया जा चुका है।