हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिड मेडिकल सांइसेज (हिम्स) के वरिष्ठ डॉ. बिस्वरूप रायचौधरी ने दावा किया है कि पोस्च्युरल मेडिसिन थेरेपी के जरिए किडनी मरीजों को डायलिसिस से छुटकारा मिल सकता है। रविवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्सटिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में राष्ट्रीय एकता दिवस और सरदार वल्लभ भाई पटेल की वर्षगांठ को लेकर जानकारी देते हुए डॉ. चौधरी ने पोस्च्युरल मेडिसिन के बारे में बताया।
यह एलोपैथी की तुलना में कहीं अधिक तेज
उन्होंने कहा कि यह एलोपैथी की तुलना में कहीं अधिक तेज, आयुर्वेद से अधिक सुरक्षित, होम्योपैथी से अधिक किफायती और नेचुरोपैथी से कहीं आसान है। उन्होंने बताया कि पैरों की ओर एक-दों ईंटों की मदद से यदि बिस्तर को ऊंचा कर दिया जाए तो सिरहाना नीचा हो जाता है, जिससे हृदय की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है।
गुरुत्वाकर्षण की इस शक्ति से डायलिसिस की अनिवार्यता खत्म
गुरुत्वाकर्षण की इस शक्ति से डायलिसिस की अनिवार्यता खत्म हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्च्युरल मेडिसिन थेरेपी व्यापक रिसर्च पर आधारित है। इस दौरान आयुर्वेद विशेषज्ञ मनीष ने कहा कि दिल्ली में पोस्च्युरल मेडिसिन की सुविधा देने वाले 12 क्लीनिक हैं। कार्यक्रम के दौरान एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया जिसे पोस्च्युरल विज्ञान पर लिखा है।